{"_id":"6054974f3dcf5b6a850ecdbc63421001","slug":"please-take-care-of-yourself","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब भी संभलिए","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
अब भी संभलिए
Updated Fri, 17 Jan 2014 01:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सत्ता राजनीति में असंतोष के उदाहरण नए नहीं हैं, लेकिन पारदर्शिता के नाम पर बनी एक राजनीतिक पार्टी में आरोप-प्रत्यारोपों का इतनी जल्दी सार्वजनिक प्रदर्शन जितना दुखद है, उतना ही चिंतनीय भी।
विज्ञापन
विनोद कुमार बिन्नी ने आप नेतृत्व पर जो आरोप लगाए हैं, उन्हें खारिज भले नहीं किया जा सकता, पर फिलहाल इन सबके पीछे उनकी कुंठा ही दिखती है। पिछली बार बागी तेवर उन्होंने तब दिखाए थे, जब उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था, और अब वह पार्टी के इस फैसले के बाद क्षुब्ध हैं, जिसमें विधायकों को लोकसभा का टिकट न देने पर आम सहमति बनी है।
विज्ञापन
यह संभव है कि अनुभवी राजनेता बिन्नी की रुचि सत्ता से दूर रहकर ईमानदारी की लड़ाई लड़ने में उतनी न हो। पर अगर वह किसी वजह से नाराज हैं, तो नेतृत्व से बात करनी चाहिए थी। मीडिया में पार्टी की नीतियों के खिलाफ उनके मुखर होने से गलत संदेश गया है।
विज्ञापन
अलबत्ता राजनीति में अपने नौसिखिएपन के कारण ज्यादा चर्चा में आई आप इस विवाद को एक विधायक का असंतोष मानकर चुप बैठ जाती है, तो बड़ी गलती कर रही होगी। एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर उसके अंतर्विरोध कम नहीं हैं। दिल्ली के नागरिकों से बिजली का बिल न भरने की अपील करने वाले, सत्ता में आने पर हर घर में पानी पहुंचाने, बिजली का बिल आधा करने और पंद्रह दिन में जनलोकपाल विधेयक पारित कराने का वायदा करने वाले अरविंद केजरीवाल को अब एहसास हो रहा होगा कि आंदोलन करने और सरकार चलाने में बहुत फर्क है। वैचारिकता और ज्वलंत मुद्दों को दरकिनार कर केवल भ्रष्टाचार-विरोध को आधार बनाकर राजनीति संभव नहीं, यह भी अब प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, मल्लिका साराभाई, कैप्टन गोपीनाथ आदि के रुख से समझ में आ जाना चाहिए।
बेशक पार्टी में आ रहे तमाम लोग ईमानदारी के पैरोकार नहीं हैं, पर कामकाज सुधारने, सबको समान महत्व देने और पार्टीगत अनुशासन बनाने पर आप ध्यान नहीं देगी, तो उसका प्रभामंडल बिखरते देर न लगेगी। आप की कुछ बैठकों में दिखी अव्यवस्था, निशाने पर आए उसके कुछ मंत्री और दिल्ली में एक विदेशी महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार को मुद्दा बनाकर कांग्रेस का आंदोलन में उतरना बताता है कि आप के लिए आने वाले दिन चुनौती भरे होंगे।