{"_id":"c8883a4b8902838ceb25625bb5d6b1c0","slug":"piyush-misra-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" ‘उड़ान- 2014’ में गूंजे पीयूष मिश्रा के गीत, दिया गुरु मंत्र","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
‘उड़ान- 2014’ में गूंजे पीयूष मिश्रा के गीत, दिया गुरु मंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 14 Dec 2014 03:14 AM IST
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लेकिन अक्सर इस चकाचौंध में इन कलाकारों या उद्यमियों का संघर्ष कहीं खो जाता है। इसी संघर्ष की कहानी को सबकेसामने रखने के लिए आईआईएम रोहतक में हुआ ‘उड़ान-2014’।
शनिवार शाम को प्रसिद्ध थियेटर आर्टिस्ट, अभिनेता, गीतकार, लेखक और गायक पीयूष मिश्रा ने अपने गीतों के साथ जिंदगी के कई पहलुओं और संघर्ष को बेबाकी से बयान किया। थियेटर के दिनों के अपने 20 वर्षों के संषर्ष को मन का काम बताते हुए कहा कि हमने वही किया जो हम चाहते थे, लोग इसे संषर्घ कहते हैं।
गीतों के बीच चलती रही संघर्ष की कहानी
शाम पांच बजे एमडीयू के राधाकृष्णन आडिटोरियम में अभिनेता पीयूष मिश्रा ने अपने संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने अपने मशहूर गीत एक बगल में चांद होगा, एक बगल में रोटियां.. और गुलाल फिल्म के गीत गालिब ये मोमिन मजाजों की दुनिया, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है.. सुनाकर माहौल को हल्का किया। एक घंटे तक पीयूष मिश्रा ने अपने अंदाज में जिंदगी, काम और कामयाबी का फलसफा बताया। कई और गीत कहीं पे जाए लड़की मुड़की.. ये भगवानों की तकरीर है और कुछ बड़ों की सीख है, ये भौर का जो वक्त है, के जैसे गंगा तीर है..., और हुस्नां की भी प्रस्तुति दी।
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छात्रों ने जाना संकट प्रबंधन
‘एक उद्यमी का निर्माण’ विषय पर सुबह एक कंपनी के फाउंडर प्रदीप गिडवानी और एक प्रसिद्ध कंपनी के एमडी संजीव बजाज ने अपने अनुभव साझा किए। संजीव बजाज ने कारपोरेट स्तर पर संकट प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। कहा, संकट एक उद्यमी के जीवन का अहम हिस्सा है और ये व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है। निर्णय तर्क द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन भावनाओं में बहकर निर्देशित नहीं होना चाहिए। दूसरे वक्ताओं दीपक धमीजा और अक्षय सक्सेना ने कहा कि उद्यमिता की जड़ें उस काम को करने में हैं, जिसके लिए मन में जुनून हो।
रोहतक को मिला पहला ईनाम
आईआईएम रोहतक की ओर से हुए ‘इग्नाइटस’ उड़ान की बी-प्लान प्रतियोगिता में देशभर की 52 टीमों ने हिस्सा लिया। आखिरी चरण में 5 टीम पहुंची। पहले स्थान पर आईआईएम रोहतक की टीम रही। टीम को 35 हजार रुपये का ईनाम दिया गया।
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लेकिन अक्सर इस चकाचौंध में इन कलाकारों या उद्यमियों का संघर्ष कहीं खो जाता है। इसी संघर्ष की कहानी को सबकेसामने रखने के लिए आईआईएम रोहतक में हुआ ‘उड़ान-2014’।
शनिवार शाम को प्रसिद्ध थियेटर आर्टिस्ट, अभिनेता, गीतकार, लेखक और गायक पीयूष मिश्रा ने अपने गीतों के साथ जिंदगी के कई पहलुओं और संघर्ष को बेबाकी से बयान किया। थियेटर के दिनों के अपने 20 वर्षों के संषर्ष को मन का काम बताते हुए कहा कि हमने वही किया जो हम चाहते थे, लोग इसे संषर्घ कहते हैं।
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गीतों के बीच चलती रही संघर्ष की कहानी
शाम पांच बजे एमडीयू के राधाकृष्णन आडिटोरियम में अभिनेता पीयूष मिश्रा ने अपने संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने अपने मशहूर गीत एक बगल में चांद होगा, एक बगल में रोटियां.. और गुलाल फिल्म के गीत गालिब ये मोमिन मजाजों की दुनिया, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है.. सुनाकर माहौल को हल्का किया। एक घंटे तक पीयूष मिश्रा ने अपने अंदाज में जिंदगी, काम और कामयाबी का फलसफा बताया। कई और गीत कहीं पे जाए लड़की मुड़की.. ये भगवानों की तकरीर है और कुछ बड़ों की सीख है, ये भौर का जो वक्त है, के जैसे गंगा तीर है..., और हुस्नां की भी प्रस्तुति दी।
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छात्रों ने जाना संकट प्रबंधन
‘एक उद्यमी का निर्माण’ विषय पर सुबह एक कंपनी के फाउंडर प्रदीप गिडवानी और एक प्रसिद्ध कंपनी के एमडी संजीव बजाज ने अपने अनुभव साझा किए। संजीव बजाज ने कारपोरेट स्तर पर संकट प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। कहा, संकट एक उद्यमी के जीवन का अहम हिस्सा है और ये व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है। निर्णय तर्क द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन भावनाओं में बहकर निर्देशित नहीं होना चाहिए। दूसरे वक्ताओं दीपक धमीजा और अक्षय सक्सेना ने कहा कि उद्यमिता की जड़ें उस काम को करने में हैं, जिसके लिए मन में जुनून हो।
रोहतक को मिला पहला ईनाम
आईआईएम रोहतक की ओर से हुए ‘इग्नाइटस’ उड़ान की बी-प्लान प्रतियोगिता में देशभर की 52 टीमों ने हिस्सा लिया। आखिरी चरण में 5 टीम पहुंची। पहले स्थान पर आईआईएम रोहतक की टीम रही। टीम को 35 हजार रुपये का ईनाम दिया गया।