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अधर में लटका शहर में पीएचसी बनने का प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Wed, 10 Sep 2014 02:47 AM IST
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शहर में चार नई पीएचसी बनने का मामला अब अधर में लटकता नजर आ रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग जिन मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए पीएचसी खोलना चाहता है दरअसल उसका खाका ही अभी तक तैयार नहीं किया गया है।
वहीं विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहित किसी भी वक्त लागू की जा सकती है। ऐसे में न ही पीएचसी खोलने का मामला हाल फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।
शहर में चार पीएचसी की योजना के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने जहां घोषणा तो कर दी वहीं चार माह बीत जाने के बावजूद अभी जगह की तलाश ही खत्म नहीं हो पाई है।
यही नहीं विभाग की ओर से अभी तक इन पीएचसी में तैनात किए जाने वाले स्टाफ का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया है। और तो और सरकार को भेजा जाने वाला स्टीमेट ही विभाग के आला अधिकारियों ने तैयार नहीं किया है। ऐसे में पीएचसी निर्माण विभाग की महज एक कोरी कल्पना मात्र है।
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विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी कोशिश जारी है। जगह मिलते ही स्टाफ की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
इसलिए बनाई गई थी योजना
विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसी बस्तियों के लोग अक्सर बगैर जागरुकता के बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं उनके बच्चे भी पोषण की चपेट में जाते हैं।
जिस कारण कई बार बच्चों की मौत हो जाती है। ऐसे में शहर में नेहरू कालोनी, गोहाना अड्डा इलाका, सुखपुरा चौक और सल्लारा मोहल्ला आदि स्लम इलाकों में ये पीएचसी बननी थी। इस योजना का उद्देश्य स्लम बस्ती में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना था। लेकिन चार माह बाद भी यह योजना शुरू नहीं हो पाई।
किया जा रहा है जगह का चयन
पीएचसी के लिए जगहों का चयन किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों को इस काम पर लगाया गया है। जगह मिलते ही पीएचसी शुरू कर दी जाएगी। जैसे-जैसे जगह मिलेगी। पीएचसी शुरू होती जाएंगी। सभी पीएचसी एक साथ शुरू करने जैसी कोई बाध्यता नहीं है। जब तक स्थायी स्टाफ नहीं मिलेगा। तब तक विभाग से ही काम चलाना होगा।
डॉ. शिव कुमार, जिला सिविल सर्जन
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वहीं विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहित किसी भी वक्त लागू की जा सकती है। ऐसे में न ही पीएचसी खोलने का मामला हाल फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।
शहर में चार पीएचसी की योजना के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने जहां घोषणा तो कर दी वहीं चार माह बीत जाने के बावजूद अभी जगह की तलाश ही खत्म नहीं हो पाई है।
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यही नहीं विभाग की ओर से अभी तक इन पीएचसी में तैनात किए जाने वाले स्टाफ का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया है। और तो और सरकार को भेजा जाने वाला स्टीमेट ही विभाग के आला अधिकारियों ने तैयार नहीं किया है। ऐसे में पीएचसी निर्माण विभाग की महज एक कोरी कल्पना मात्र है।
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विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी कोशिश जारी है। जगह मिलते ही स्टाफ की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
इसलिए बनाई गई थी योजना
विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसी बस्तियों के लोग अक्सर बगैर जागरुकता के बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं उनके बच्चे भी पोषण की चपेट में जाते हैं।
जिस कारण कई बार बच्चों की मौत हो जाती है। ऐसे में शहर में नेहरू कालोनी, गोहाना अड्डा इलाका, सुखपुरा चौक और सल्लारा मोहल्ला आदि स्लम इलाकों में ये पीएचसी बननी थी। इस योजना का उद्देश्य स्लम बस्ती में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना था। लेकिन चार माह बाद भी यह योजना शुरू नहीं हो पाई।
किया जा रहा है जगह का चयन
पीएचसी के लिए जगहों का चयन किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों को इस काम पर लगाया गया है। जगह मिलते ही पीएचसी शुरू कर दी जाएगी। जैसे-जैसे जगह मिलेगी। पीएचसी शुरू होती जाएंगी। सभी पीएचसी एक साथ शुरू करने जैसी कोई बाध्यता नहीं है। जब तक स्थायी स्टाफ नहीं मिलेगा। तब तक विभाग से ही काम चलाना होगा।
डॉ. शिव कुमार, जिला सिविल सर्जन