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‘फरिश्तों’ की हड़ताल से टूट रही मजबूरों की सांसें

Mon, 22 Sep 2014 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक Updated Mon, 22 Sep 2014 02:24 AM IST
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पीजीआई में ‘फरिश्तों’ का गुस्सा अभी कम नहीं हुआ है।
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इलाज की आस के साथ मरीजों की सांस भी अब टूटती जा रही है।

कुछ लोग तो जिदंगी दांव पर लगाते हुए अभी हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं वहीं कईयों की सांस इसी इंतजार में टूट रही है। कई ऐसे परिजन भी है जिन्होंने पीजीआई में हड़ताल की स्थिति को भांपते हुए निजी अस्पताल में ही मरीज को ले जाना उचित समझ रहे हैं।

जबकि आर्थिक तंगी से मजबूर इन मरीजों को फरिश्तों की हड़ताल खत्म होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार है। कि आखिर कब ये फरिश्ते अपने वरिष्ठ डॉक्टरों की तरह हमें इस दर्द से निजात दिलाएंगे।
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पीजीआई में रविवार को डॉक्टरों की हड़ताल का तीसरा दिन रहा। इन तीन दिनों में यहां आने वाले मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ी है। कई वार्डों से मरीजों का पलायन हो चुका है और कई मरीज अभी भी है। हड़ताल होने की वजह से आउटडोर और इमरजेंसी में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उधर शिशु वार्ड से भी कई मरीज अपने बच्चों को लेकर दूसरे अस्पताल चले गए।
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मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल का सहारा
वार्डों में भर्ती मरीजों की जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष (वार्ड इंचार्ज) डॉक्टर पर निर्भर हो गई है। यूनिट वायस डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। लेकिन एक डॉक्टर पर करीब 20 से ज्यादा मरीजों की जिम्मेदारी होने से इलाज से मरीज पूरी तरह से संतुष्ट नहीं नजर आ रहे हैं। हालांकि खुुलकर बोल भी नहीं सकते। डर हैं अब कहीं ये फरिश्ते नाराज हो गए तो? एक मरीज के परिजनों का कहना था कि वह अपने मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में ले जा रहे हैं, क्योंकि सीनियर डॉक्टर के पास काम ज्यादा होने से सभी मरीजों पर वह पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। पैसा ज्यादा खर्च होगा, लेकिन इलाज तो ठीक से हो जाएगा। रविवार को न जाने कितने मरीज पीजीआई में आने के बावजूद प्राइवेट अस्पताल की ओर रुख करने को मजबूर हुए।


मजबूरी है नहीं जा सकते
एक मरीज ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उसे कैंसर है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर है। यहां जो खर्च हो रहा है वह सहन किया जा सकता है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल में जाने की उसकी हैसियत नहीं है। हड़ताल के कारण सीनियर डॉक्टर दिन में एक बार ही सिर्फ हालचाल पूछ कर जा रहे हैं। शिशु वार्ड में भर्ती एक बच्चे के पिता ने बताया कि पिछले दो दिन से उसका बच्चा यहां भर्ती  है। अब यहां से दूसरे अस्पताल ले जाऊंगा तो वहां नए सिरे से इलाज शुरू होगा। इसलिए यहीं पर रहकर इंतजार कर रहे हैं। दुआ कर रहे हैं कि डॉक्टरों की हड़ताल कल तक खत्म हो जाए।
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