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पीजीआई में हड़ताल जारी, डॉक्टर हंगामे पर उतरे
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Mon, 22 Sep 2014 02:16 AM IST
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जूनियर डॉक्टर मरीजों के परिजनों से मार खा रहे हैं। भूखे प्यासे दो दिन से बाहर बैठे हैं।
लेकिन पीजीआई प्रबंधन के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है। चिकित्सकाें की सुरक्षा के इंतजाम करने के बजाए पीजीआई में कांफ्रेंस हो रही हैं।
इससे साफ है कि संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों को जूनियर का दर्द नहीं दिख रहा है। पीजीआई के विजय पार्क में बैठे हड़ताली चिकित्सक रविवार दोपहर एक बजकर 27 मिनट पर उठे और नारेबाजी करते हुए एलटी वन की ओर चल दिए। यहां रेडियोथैरेपी विभाग की नेशनल कांफ्रेंस चल रही थी।
गुस्साए डॉक्टर कांफ्रेंस हाल में घुस गए और नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए हंगामे से वरिष्ठ चिकित्सकों के अलावा अतिथि भी सकते में आ गए। कुछ चिकित्सक उठे और गुस्साए चिकित्सकों से शांति बनाए रखने की अपील की। लेकिन किसी की नहीं सुनी गई।
18 मिनट हंगामे के बाद चिकित्सक हॉस्टल में लंच पर चले गए। फैसला लिया कि शाम साढ़े पांच बजे बैठक करेंगे। मांग पूरी नहीं होने तक प्रदर्शन और हड़ताल जारी रहेगी।
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मुश्किल से संभले हालात
हंगामे के बाद कांफ्रेंस हाल के हालात काफी देर तक सामान्य नहीं हो पाए। कई वक्ताओं ने तो अपना वक्तव्य दो से चार मिनट में ही निपटा दिया तो एक दो ने मात्र प्रेजेंटेशन तक ही खुद को सीमित रखा। अतिथि चिकित्सक लगातार हंगामे पर चर्चा करते रहे। दरअसल, आयोजकों को भी इस बात का इल्म नहीं था कि उनके जूनियर ऐसा भी कर सकते हैं।
जारी रहेगी हड़ताल
शाम साढ़े पांच बजे विजय पार्क में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि हड़ताल जारी रहेगी। हड़तालियों ने कहा कि अधिकारियों ने उनसे बात नहीं की है। स्पष्ट है कि अधिकारी उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रबंधन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। शनिवार की तरह ही रविवार को भी यहां भर्ती मरीजों को पूरा इलाज नहीं मिल सका। रविवार होने के कारण ओपीडी में छुट्टी से प्रबंधन को जरूर राहत मिली। ऐसे में सोमवार को ओपीडी में भारी भीड़ को संभालना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगा।
हंगामे की सुबह ही बनाई रणनीति
रविवार को तीसरे दिन भी पीजीआई चिकित्सकों की हड़ताल जारी रही। सुबह डॉक्टर विजय पार्क में आ डटे। सूत्र बताते हैं कि चिकित्सकों के एक दल ने पहले ही योजना तैयार कर ली थी कि दोपहर तक प्रबंधन की ओर से कोई अधिकारी बात करने नहीं पहुंचा तो वे कांफ्रेंस में हंगामा करेंगे। बाहर से आने वाले चिकित्सकों को भी इस बात का पता चल सके कि पीजीआई के जूनियर चिकित्सक किन हालातों में काम कर रहे हैं।
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लेकिन पीजीआई प्रबंधन के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है। चिकित्सकाें की सुरक्षा के इंतजाम करने के बजाए पीजीआई में कांफ्रेंस हो रही हैं।
इससे साफ है कि संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों को जूनियर का दर्द नहीं दिख रहा है। पीजीआई के विजय पार्क में बैठे हड़ताली चिकित्सक रविवार दोपहर एक बजकर 27 मिनट पर उठे और नारेबाजी करते हुए एलटी वन की ओर चल दिए। यहां रेडियोथैरेपी विभाग की नेशनल कांफ्रेंस चल रही थी।
गुस्साए डॉक्टर कांफ्रेंस हाल में घुस गए और नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए हंगामे से वरिष्ठ चिकित्सकों के अलावा अतिथि भी सकते में आ गए। कुछ चिकित्सक उठे और गुस्साए चिकित्सकों से शांति बनाए रखने की अपील की। लेकिन किसी की नहीं सुनी गई।
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18 मिनट हंगामे के बाद चिकित्सक हॉस्टल में लंच पर चले गए। फैसला लिया कि शाम साढ़े पांच बजे बैठक करेंगे। मांग पूरी नहीं होने तक प्रदर्शन और हड़ताल जारी रहेगी।
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मुश्किल से संभले हालात
हंगामे के बाद कांफ्रेंस हाल के हालात काफी देर तक सामान्य नहीं हो पाए। कई वक्ताओं ने तो अपना वक्तव्य दो से चार मिनट में ही निपटा दिया तो एक दो ने मात्र प्रेजेंटेशन तक ही खुद को सीमित रखा। अतिथि चिकित्सक लगातार हंगामे पर चर्चा करते रहे। दरअसल, आयोजकों को भी इस बात का इल्म नहीं था कि उनके जूनियर ऐसा भी कर सकते हैं।
जारी रहेगी हड़ताल
शाम साढ़े पांच बजे विजय पार्क में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि हड़ताल जारी रहेगी। हड़तालियों ने कहा कि अधिकारियों ने उनसे बात नहीं की है। स्पष्ट है कि अधिकारी उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रबंधन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। शनिवार की तरह ही रविवार को भी यहां भर्ती मरीजों को पूरा इलाज नहीं मिल सका। रविवार होने के कारण ओपीडी में छुट्टी से प्रबंधन को जरूर राहत मिली। ऐसे में सोमवार को ओपीडी में भारी भीड़ को संभालना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगा।
हंगामे की सुबह ही बनाई रणनीति
रविवार को तीसरे दिन भी पीजीआई चिकित्सकों की हड़ताल जारी रही। सुबह डॉक्टर विजय पार्क में आ डटे। सूत्र बताते हैं कि चिकित्सकों के एक दल ने पहले ही योजना तैयार कर ली थी कि दोपहर तक प्रबंधन की ओर से कोई अधिकारी बात करने नहीं पहुंचा तो वे कांफ्रेंस में हंगामा करेंगे। बाहर से आने वाले चिकित्सकों को भी इस बात का पता चल सके कि पीजीआई के जूनियर चिकित्सक किन हालातों में काम कर रहे हैं।