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मूत्र से मोबाइल चार्जिंग ऐसी तकनीक इस्तेमाल करना चाहेंगे?

Tue, 05 Aug 2014 12:12 PM IST
Updated Tue, 05 Aug 2014 12:12 PM IST
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Pee to power your smartphone, tablets, Soon

नासा के खगोल वैज्ञानिक इस कोशिश में हैं कि मूत्र को पीने के पानी के रूप में बदला जा सके। वहीं धरती पर मूत्र को जल्द स्मार्टफोन और टैबलेट को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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ब्रिटेन के ब्रिस्टॉल रोबोटिक्स प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं (BRL) 'यूरीन-ट्राइसिटी' प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण पर काम कर रहे हैं। यूरीन-ट्राइसिटी के जरिए मूत्र को इलेक्ट्रिकल पावर में बदला जा रहा है।
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ब्रिस्टॉल रोबेटिक्स प्रयोगशाला की वेबसाइट पर कहा गया है 'ये प्रमाणित हो चुका है कि यूरीन-ट्राइसिटी में माइक्रोबीयल फ्यूल सेल्स (MFCs) के जरिए मोबाइल फोन को चार्जिंग की जा सकती है।
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यूरीन-ट्राइसिटी प्रोजेक्ट का मकसद है कि ऐसी एनर्जी तकनीक बनाना, जिसका इस्तेमाल दैनिक जीवन में किया जा सके और लोगों की उस मान्यता को भी बदला जाए जिसमें यूरीन को व्यर्थ समझा जाता है।

कैसे है संभव

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‌जब यू‌रीन माइक्रोबीयल फ्यूल सेल्स (MFCs) से गुजरता है तो माइक्रोब (जीवाणु) इसको सामान्य मेटाबॉलिक प्रोसेस के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस कारण इससे इलेक्ट्रॉन उत्पन्न होते हैं। सेल्स में मौजूद इलेक्ट्रोड इन इलेक्ट्रॉन को इक्टठा करते है और जब इसको सर्किट से कनेक्ट किया जाता है तो बिजली पैदा होती है।

जिसका इस्तेमाल मोबाइल फोन और टैबलेट को चार्ज करने के लिए किया जा सकता है।

पानी की बूंदों से चार्ज मोबाइल

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अगर आपसे ये कहा जाए कि हवा की नमी से स्मार्टफोन या आईपैड चार्ज किया जा सकता है, तो शायद यकीन करना मुश्किल है। लेकिन वैज्ञानिकों ने इसको संभव करने की कोशिश की है। आने वाले समय में ऐसा मुमकिन हो सकता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि उच्च स्तर के रिपेलिंग सर्फेस पर गिरने वाली बूंदों का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जा सकता है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बिजली से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज किया जा सकता है।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी की बूंदे जब सुपरहाइड्रोफोबिक सर्फेस से उछलती हैं तब इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रिक चार्ज उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया में छोटी मात्रा में बिजली भी उत्पन्न की जा सकती है, जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने में किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया के जरिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने के अलावा साफ पानी भी निकाला जा सकता है।

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