फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Parsi community

पारसी समुदाय

Mon, 30 Dec 2013 07:45 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Mon, 30 Dec 2013 07:45 PM IST
विज्ञापन
Parsi community

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पारसी समुदाय की घटती आबादी पर चिंता जताई है। पारसी समुदाय, दुनिया के पुराने धर्मों में से एक जरथुस्त्रवाद से ताल्लुक रखता है, लेकिन अभी विश्व में इनकी आबादी एक लाख चालीस हजार से भी कम है, जिनमें से एक तिहाई की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। इस समुदाय के लोग एकेश्वरवादी हैं, जो अग्नि की पूजा करते हैं।

विज्ञापन


ये लोग पर्सिया (वर्तमान ईरान) से दुनिया भर में गए हैं। जब ईरान में इनके ऊपर सातवीं शताब्दी में अरब अत्याचार बढ़ने लगे, तो अपनी जान बचाकर ये लोग भागे थे। ईरान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कई देशों में पारसी समुदाय के लोग रहते हैं, लेकिन भारत में इनके बसने के बारे में एक मिथकीय किस्सा प्रचलित है। कुछ थके-हारे पारसी लोगों का समूह जब मुंबई से करीब सौ किलोमीटर उत्तर संजन राज्य में शरण मांगने पहुंचा, तो वहां के राजा जादी राणा ने उन्हें दूध से भरा एक कटोरा दिया, जिसका मतलब था कि उनकी जमीन पहले से भरी हुई है, इसलिए वह शरण नहीं दे सकते। इन शरणार्थियों के मुखिया ने उस दूध के कटोरे में थोड़ी सी चीनी मिलाकर राजा को वापस भेज दिया।
विज्ञापन


राजा ने पारसियों का संदेश समझ लिया कि भरे हुए कटोरे में थोड़ी सी चीनी डालने से दूध छलकेगा नहीं, बल्कि उसकी मिठास बढ़ जाएगी। फिर उन्होंने इस समुदाय को बसने की अनुमति दे दी। इस समुदाय के ज्यादातर लोग गुजरात और महाराष्ट्र में रहते हैं। शिक्षित एवं समृद्ध माने जाने वाले ये लोग शादी एवं बच्चे पैदा करने के प्रति बहुत उदासीन हैं। इसलिए भारत में इनकी आबादी घटकर करीब 61 हजार ही रह गई है। सरकार ने भी इनकी आबादी बढ़ाने के लिए जियो पारसी नामक कार्यक्रम शुरू किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed