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फिक्सिंग के बाद लीपापोती

Tue, 28 May 2013 01:32 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 28 May 2013 01:32 PM IST
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painting after fixing

आईपीएल की फिक्सिंग में अपने दामाद की गिरफ्तारी के बावजूद नारायणस्वामी श्रीनिवासन का बीसीसीआई अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार न होना बताता है कि अपनी ओर उठती उंगली के बावजूद उच्च पदों पर बैठे लोगों पर अब नैतिकता का दबाव काम नहीं करता।

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बल्कि संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने जो कुछ कहा, उससे पता चलता है कि वह अपने दामाद को बचाने की कोशिश में लगे हैं! उनका तर्क है कि गुरुनाथ की टीम परिचालन में कोई भूमिका नहीं थी।
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जबकि आईपीएल आयुक्त राजीव शुक्ला का पुराना ई-मेल बताता है कि गुरुनाथ चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिकों में से थे।

ट्वीटर प्रोफाइल में भी गुरुनाथ ने खुद को चेन्नई सुपरकिंग्स का टीम प्रिंसिपल बताया था। साफ है कि श्रीनिवासन अपने दामाद की भूमिका को महत्वहीन बताने की कोशिश कर रहे हैं। जांच के लिए कमेटी गठित करने की उनकी घोषणा तो मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि कमेटी में अधिकांश तो उनके करीबी ही हैं।
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बोर्ड के जो सदस्य बहुमत के अभाव में श्रीनिवासन को बीसीसीआई से बाहर नहीं कर पा रहे, क्या वे उनसे उनके दामाद के बारे में पूछताछ कर पाएंगे? जिस चेन्नई सुपर किंग्स में अपनी संदिग्ध भूमिका के कारण गुरुनाथ को गिरफ्तार किया गया है, श्रीनिवासन उसके प्रबंध निदेशक हैं; और जांच कमेटी के गठन की घोषणा श्रीनिवासन ने बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर की है।

यानी टीम उनकी, दामाद उनका और क्रिकेट बोर्ड के मुखिया भी वही-ऐसे में वह न्याय करेंगे, इसकी रत्ती भर भी गारंटी कैसे होगी? अगर वह सचमुच ईमानदार हैं, तो ऐसी कमेटी का गठन क्यों नहीं करते, जिसमें बीसीसीआई के लोग न हों! खेलों की स्वायत्तता में दखल बेशक ठीक नहीं, पर आईपीएल में जो हो रहा है, उसे देखते हुए सरकार का हस्तक्षेप जरूरी लगता है।


अब कुछ और फिक्सरों के बारे में जो ताजा खुलासा हुआ है, उसके बाद कोई भला कैसे मान ले कि फिक्सिंग के खिलाफ कानून बना देने से मामला सुलझ जाएगा? बल्कि मौजूदा स्थिति में क्रिकेट की गरिमा को बनाए रखने का कोई प्रयास श्रीनिवासन को बाहर किए बिना और बीसीसीआई में पारदर्शिता के लिए कदम उठाए बगैर अधूरा ही होगा।

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