क्रिकेट से अधिक कुछ नहीं
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आम चुनाव के कारण अबुधाबी में हो रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के सातवें संस्करण की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है, जब बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटाए गए श्रीनिवासन का नाम उन 13 व्यक्तियों में शामिल पाया गया है, जिन्हें स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के मामले में जस्टिस मुकुल मुद्गल ने अपनी रिपोर्ट में संदिग्ध बताया है। क्रिकेट और मनोरंजन के इस घालमेल को लेकर जितनी भी सनसनी पैदा की जाए, मगर हकीकत यह है कि आईपीएल के कारण क्रिकेट की साख ही दांव पर लग गई है। हालत यह है कि सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत के जस्टिस ए के पटनायक को श्रीनिवासन को यह कहना पड़ा है कि वह अपने पर लगे आरोपों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं!
असल में आईपीएल के पिछले संस्करण में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद से ही जिस तरह से बीसीसीआई की भूमिका पर उंगली उठ रही थी, उससे साफ था कि इसमें शीर्ष स्तर के लोग शामिल हैं। यह दुखद है कि आईपीएल की शुरुआत करते समय उम्मीद की गई थी कि इसके जरिये देश-विदेश के खेल प्रेमियों को रोमांचक क्रिकेट देखने को मिलेगा, साथ ही नई प्रतिभाओं को सामने लाने का मौका मिलेगा।
कुछेक अपवादों को छोड़ दें, तो यह खेल और मनोरंजन का बड़ा बाजार बनकर रह गया है। सर्वोच्च अदालत की दखल के बाद क्रिकेट के कर्ताधर्ताओं को एक मौका मिला है कि वे आईपीएल के जरिये खेल में आई गंदगी की सफाई करें। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं है, क्योंकि बीसीसीआई अपने आप में एक बड़ा गिरोह बनकर रह गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि श्रीनिवासन की जगह बीसीसीआई की कमान संभाल रहे सुनील गावस्कर इस दिशा में क्या कर पाते हैं। हालांकि यह काम उनके अकेले के जिम्मे नहीं छोड़ा जा सकता; यह आईपीएल की टीमों के मालिक बने औद्योगिक घरानों की भी जिम्मेदारी है कि वे क्रिकेट के साथ खिलवाड़ न करें।
उम्मीद है कि आईपीएल में इस बार रोमांच के साथ अच्छा क्रिकेट भी देखने को मिलेगा। ऐसा तभी संभव होगा, जब आईपीएल से जुड़े सभी लोग, जैसा कि राजस्थान रॉयल्स के नए कप्तान शेन वाट्सन ने कहा है-यह सुनिश्चित करें कि कोई भी न तो नियम तोड़े, और न अपनी सीमा रेखा लांघे।