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कांग्रेस के निशाने पर

Fri, 27 Dec 2013 08:36 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 27 Dec 2013 08:36 PM IST
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on the target of congress

भाजपा क्या गलत कह रही है कि कांग्रेस उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ी है! जिस दिन अहमदाबाद के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने मोदी को गुजरात दंगे में क्लीन चिट दी, ठीक उसी दिन कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा कथित रूप से एक महिला की जासूसी कराए जाने की घटना की जांच के लिए आयोग गठित कर दिया। हालांकि इस मुद्दे पर भाजपा शुरू से ही कमजोर जमीन पर खड़ी है। एक महिला की जासूसी कराना उसकी निजता के अधिकार का तो हनन है ही, इस मामले में राज्य ने अपनी शक्ति और संसाधनों का बेजा इस्तेमाल भी किया था। कर्नाटक के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की जासूसी कराने का एक ऐसा ही मामला वर्षों पहले जब सामने आया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था। जबकि भाजपा ऐसी कोई जरूरत महसूस नहीं करती। अलबत्ता इस आधार पर कांग्रेस के कदम का बचाव नहीं किया जा सकता। जांच रिपोर्ट अपने खिलाफ हो, तो उसे खारिज कर देना, जैसा कि उसने अभी आदर्श घोटाले की रिपोर्ट के साथ किया, और बड़ी चुनौती के रूप में उभरती पार्टी या शख्सियत के खिलाफ जांच बिठा देना उसके दोहरेपन का ही उदाहरण है। फिर कांग्रेस का यह फैसला दूसरी वजहों से भी संदेह पैदा करता है। आयोग नरेंद्र मोदी द्वारा कथित जासूसी कराए जाने के साथ ही अरुण जेटली के फोन कॉल रिकॉर्ड गैरकानूनी तरीके से हासिल करने और हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल के मुख्यमंत्री काल में कई नेताओं के फोन टैप कराने की भी जांच करेगा। ये तीन मामले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े हैं। इसके अलावा आयोग अपनी रिपोर्ट तब देगा, जब लोकसभा चुनाव का अभियान शिखर पर होगा। चुनावी लाभ लेने की मंशा से ही कांग्रेस ने आयोग को तीन महीने में जांच पूरी करने का समय दिया है। मोदी मामले में केंद्र द्वारा जांच आयोग का गठन करना तकनीकी तौर पर भले ही सही हो, पर जब गुजरात सरकार इस मामले की जांच करा ही रही है, तब कांग्रेस को उसकी रिपोर्ट आने तक तो इंतजार कर लेना चाहिए था। लेकिन कांग्रेस को डर है कि तब तक समय हाथ से निकल जाएगा। आप की विदेशी फंडिंग की जांच का संकेत देकर और अरविंद केजरीवाल के शपथ लेने से पहले दिल्ली में सीएनजी के दाम बढ़ाकर भी कांग्रेस ने यही जताया है कि वह राजनीति की लड़ाई को सिर्फ राजनीतिक तरीके से लड़ने में यकीन नहीं रखती।  

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