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अब काले धन पर केजरीवाल
नई दिल्ली
Updated Fri, 09 Nov 2012 09:24 PM IST
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सरकार का चेहरा बदलने के बाद संगठन में नई ऊर्जा भरने के लिए सूरजकुंड में मंथन कर रही कांग्रेस अरविंद केजरीवाल के ताजा आरोपों को भले ही खारिज कर दे, मगर यदि उनके दावे सही हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि काला धन देश के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के खुलासों को सिर्फ आरोप माना जाए, तो भी यह किसी से छिपा नहीं है कि देश के भीतर और बाहर काले धन का एक ताकतवर गठजोड़ काम कर रहा है, जिससे टकराना आसान नहीं है।
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अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने अंबानी बंधुओं, जेट एजरवेज के नरेश अग्रवाल, डाबर समूह, बिड़ला समूह और कांग्रेस सांसद अनु टंडन के साथ ही एचएसबीसी बैंक पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं, इसलिए इन आरोपों की जांच जरूरी है। इन आरोपों को सिर्फ यह कहकर खारिज नहीं किया जा सकता कि यह राजनीति के मैदान में उतरे केजरीवाल का कोई नया हथकंडा है।
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वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने जो मुहिम शुरू की है, यह उसी की ताजा कड़ी है। आखिर किसी विदेशी बैंक को देश की आर्थिक संप्रभुता को चुनौती देने की इजाजत कैसे दी जा सकती है? यदि बिना स्विट्जरलैंड गए यहीं से एचएसबीसी की जिनेवा शाखा में खाता खोला जा सकता है, वहां धन जमा कराया जा सकता है या निकाला जा सकता है, तो संदेह नहीं कि इसका लाभ आतंकी संगठन भी उठा सकते हैं।
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जांच में यह बात सामने आ ही चुकी है कि किस तरह आतंकी संगठन हवाला के जरिये हमले के लिए धन का इंतजाम करते हैं। अंबानी बंधुओं की ओर से कहा जा रहा है कि एचएसबीसी बैंक में उनका कोई खाता नहीं है, मगर यह तो जांच का विषय होना चाहिए। आखिर यही तो स्विस बैंकों की गुत्थी है कि वहां खाते किसी फरजी नाम से भी खोले जा सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन जाने से कुछ महीने पहले वित्त मंत्री रहते प्रणब मुखर्जी ने विदेशों में जमा काले धन पर श्वेतपत्र जारी किया था, मगर छह-सात महीने बाद भी इसके खिलाफ किसी तरह की ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। काले धन के मुद्दे पर केंद्र सरकार कितनी गंभीर है, यह कहने की जरूरत नहीं है। स्वयं सर्वोच्च न्यायालय विदेशों में जमा काले धन को लाने में गंभीरता नहीं दिखाने पर सरकार की खिंचाई कर अपनी ओर से विशेष जांच दल तक गठित कर चुका है। काले धन ने देश में एक समानांतर अर्थव्यवस्था बना ली है, यह एक सचाई है।