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अब सिर्फ दो स्प्रे से दूर होगी मरगोजा की बीमारी

Fri, 21 Mar 2014 12:50 AM IST
ब्यूरो, भिवानी
ब्यूरो, भिवानी Updated Fri, 21 Mar 2014 12:50 AM IST
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अब रुखड़ी (मरगोजा) नामक परजीवी से सरसों की फसलों को बचाया जा सकेगा। किसान सरसों की फसल को सिर्फ गलाइफोसेट दवा के दो स्प्रे से बचा सकेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बहल क्षेत्र के सूरपुरा कलां गांव के खेतों में इस दवा का प्रयोग किया जो सफल साबित हुआ है। इससे किसान फसलों को होने वाले नुकसान से बचा सकेंगे।

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रबी फसल के सीजन में किसानों को सरसों की फसल बुआई के साथ ही मरगोजा का डर सताने लगता है, क्योंकि मरगोजा नामक यह परजीवी सरसों की पैदावार को काफी हद तक कम कर देता है। सरसों की फसल अक्टूबर माह में बोई जाती है जबकि रुखड़ी (मरगोजा) का पता जनवरी में जाकर पता चलता है।
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तब तक काफी देर हो चुकी होती है तथा मरगोजा सरसों के पौधे को पूरी तरह से अपने आगोश में लेकर उसकी वृद्घि को रोक देता है। इस कारण किसान की मेहनत पर न सिर्फ पानी फिर जाता है बल्कि फसल की बुआई से कटाई तक लेकर आर्थिक तौर पर किसान को नुकसान झेलना पड़ता है।
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15 मन तक गिर जाती है पैदावार
आमतौर पर यह माना जाता है कि मौसम फसल के माफिक हो तो सरसों की पैदावार 20 मन प्रति एकड़ होती है। लेकिन जब सरसों की फसल मरगोजा की चपेट में आती है तो पैदावार गिरकर पांच मन तक आ जाती है। बहल क्षेत्र में करीब छह-सात साल पहले इस बीमारी का पता चला था। तब से यह किसानों के लिए नासूर बनी हुई थी। इससे पहले किसानों को यही सलाह दी जाती कि फसल चक्र को बदलकर ही इससे पीछा छुड़वाया जा सकता है। कुछ किसानों ने इसे खेत से उखाड़ने तथा इसके बीजों को चुन चुनकर खेतों से दूर ले जाकर जलाने की कोशिश की परंतु उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

केवल दो स्प्रे में पूरा निदान
कृषि वैज्ञानिकों ने अब इस समस्या का हल ढूंढ लिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों की बिजाई के 25 से 30 दिन बाद 25 एमएल गलाइफोसेट दवा को 120 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव करें। दूसरा स्प्रे तब किया जाना चाहिए जब सरसों की फसल 55 से 60 दिन की हो जाए। तब 50 एमएल गलाइफोसेट दवा को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे लेटफैन नोजल से किया जाना चाहिए तथा स्प्रे के समय मौसम बिल्कुल साफ होना चाहिए। इसके अलावा खेत में नमी तो हो परंतु पौधे सूखे होने चाहिए। इस पर किसी प्रकार की नमी या ओस की बूंद नहीं हो। वैज्ञानिकों का दावा है कि लगातार दो सीजन के इन दो स्प्रे में मरगोजा की समस्या से 90 प्रतिशत तक छुटकारा मिल सकता है।

सूरपुरा कलां में हुआ सफल प्रयोग
कृषि विज्ञान केन्द्र की तरफ से मरगोजा की समस्या से निजात पाने के लिए सूरपुरा कलां के खेत में किया गया प्रयोग काफी हद तक सफल रहा है। किसान पवन शर्मा के खेत में पिछले साल एक एकड़ फसल में गलाइफोसेट दवा का छिड़काव किया था। इसके बाद उस एक एकड़ में करीब 70 प्रतिशत तक मरगोजा की समस्या खत्म हो गई। दूसरे सीजन में फिर इसी तरह के स्प्रे से 90 प्रतिशत मरगोजा मिट गया जबकि खेत के दूसरे हिस्से में यह समस्या अब भी बरकरार है। यही नहीं, सूरपुरा कलां के करीब सौ एकड़ भूमि में किसानों ने अपने स्तर पर वैज्ञानिकों की सलाह से छिड़काव किया है जहां परिणाम आशा के अनुुरूप रहे हैं।



‘‘यह सही है कि मरगोजा सरसों की फसल के लिए बहुत बड़ी समस्या बनी थी। लेकिन कृषि विभाग द्वारा सूरपुरा कलां गांव के खेतों में गलाफोसेट दवा के स्प्रे से इसका लगभग निदान हो गया है। किसान अगर यह दवा प्रयोग करें तो मरगोजा की समस्या से छुटकारा पा सकते है’’।
डॉ. अमरजीत
कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, भिवानी।

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