फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   nothing got

खोदा पहाड़ निकली चुहिया

Sun, 26 Jul 2015 08:09 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 26 Jul 2015 08:09 PM IST
विज्ञापन
nothing got

दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत द्वारा श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजित चंदीला को पर्याप्त सुबूतों के अभाव में स्पॉट फिक्सिंग के जुर्म से बरी कर देने के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने के लिए अभियोजन स्वतंत्र है, पर इससे खुद दिल्ली पुलिस की साख पर जो बट्टा लगा है, उससे उबरने में समय लगेगा।

विज्ञापन


आईपीएल-6 में इन तीनों खिलाड़ियों के खिलाफ स्पॉट फिक्सिंग के सुबूत मिलने के जो दावे दिल्ली पुलिस ने किए थे, और जिस तरह इन्हें डी कंपनी से जुड़ा बताया था, वे वाकई बहुत चौंकाने वाले खुलासे थे। पर निचली अदालत का फैसला उससे भी अधिक हैरान करने वाला है, क्योंकि छह हजार पन्नों के भारी-भरकम आरोपपत्र से गुजरने और एक सौ अड़सठ गवाहों को सुनने के बाद उसने तीनों क्रिकेटरों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया है!
विज्ञापन


इस फैसले के आधार पर कोई टिप्पणी करना कठिन होगा, क्योंकि आईपीएल में सट्टेबाजी पर शीर्ष अदालत द्वारा गठित जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी ने थोड़े ही दिनों पहले गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा की क्रिकेट गतिविधियों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। अब स्थिति यह है कि आईपीएल की दो टीमों पर दो साल का प्रतिबंध है, उनके अधिकारी भी दोषी करार दिए गए हैं, पर खिलाड़ी निर्दोष हैं! सिर्फ यही नहीं कि जस्टिस मुद्गल और जस्टिस लोढ़ा, दोनों कमेटियों ने आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग को स्वीकारा है, बल्कि जस्टिस मुद्गल कमेटी ने तो 2011 के विश्व कप में खेल चुके एक खिलाड़ी के फिक्सिंग में शामिल होने की ओर इंगित भी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर हैरानी इस पर होती है कि तीनों क्रिकेटरों पर मकोका जैसे सख्त कानून के तहत मुकदमा चलाने वाली दिल्ली पुलिस को क्या इतना भी मालूम नहीं था कि ऐसे मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए अकाट्य सुबूतों की जरूरत पड़ती है? उसने दावा किया था कि उसके पास हवाला के जरिये लेन-देन करने के रिकॉर्ड हैं। पर अभियोजन के पास अगर ठोस सुबूत होते, तो अदालत यह टिप्पणी नहीं करती कि मकोका तो दूर, किसी भी कानून में इन क्रिकेटरों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इस मुद्दे पर कोई निष्कर्ष निकालने से बेहतर यह होगा कि क्रिकेट को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए स्पॉट फिक्सिंग के खिलाफ कानून बनाने के बारे में सोचा जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed