फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   ninth cm in thirteen year

तेरह साल में नौवें मुख्यमंत्री

Tue, 09 Jul 2013 10:30 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 09 Jul 2013 10:30 PM IST
विज्ञापन
ninth cm in thirteen year

झामुमो और कांग्रेस मिलकर झारखंड में एक और गठबंधन सरकार की जो नींव डाल रहे हैं, उसमें स्थायित्व का सीमेंट नहीं, अवसरवाद का गारा ही दिखाई दे रहा है। दरअसल एक स्वतंत्र राज्य के रूप में करीब तेरह वर्षों के छोटे कालखंड में भ्रष्टाचार और राजनीतिक पालाबदल का जो रूप झारखंड में सामने आया है, वह अन्यत्र शायद ही दिखा हो।

विज्ञापन


फिर जिस सरकार की अवधि महज दो साल की हो, उससे भला कोई उम्मीद भी क्या करेगा! बल्कि झारखंड के अतीत को देखते हुए इस पर भी शंका हो सकती है कि नई सरकार कार्यकाल पूरा कर भी पाएगी या नहीं! अभी सरकार बनी भी नहीं है, पर करोड़ों के लेन-देन के न सिर्फ आरोप लग रहे हैं, बल्कि कोयला, सड़क व पीडब्ल्यूडी जैसे मलाईदार मंत्रालयों पर कांग्रेस व झामुमो के बीच सौदेबाजी चलने के ब्योरे हैं। फिर जिस राज्य में निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री बन चुका हो, वहां निर्दलीयों की ताकत और सौदेबाजी की उनकी क्षमता को कम आंकने का तो सवाल ही नहीं है।
विज्ञापन


इसके बावजूद झामुमो ने सरकार गठन का बीड़ा उठाया, तो इसलिए कि शिबू सोरेन के बाद अब उनके बेटे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा हो रहा है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है, तो झामुमो के साथ मिलकर वह अगले लोकसभा चुनाव में इस राज्य में अपनी हालत सुधार सकती है; चौदह लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में उसका फिलहाल केवल एक सांसद है। पर राज्य की जो दयनीय तस्वीर है, नई सरकार उसे कितना बदल पाएगी?
विज्ञापन
विज्ञापन


भ्रष्टाचार और अवसरवादी पालाबदल का ही नतीजा है कि प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद झारखंड विकास के पायदान पर बहुत नीचे है। सड़क और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्रों में ही नहीं, शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर भी राज्य की हालत ठीक नहीं। छह महीने तक सरकार न होने के कारण विकास के बहुत सारे काम अटक गए, तो पिछले दिनों हुए नक्सली हमले ने प्रशासन-व्यवस्था की भी पोल खोल दी। राष्ट्रपति शासन के छह महीने की अवधि के भीतर सरकार बनाकर कांग्रेस और झामुमो झारखंड को सांविधानिक संकट से तो निकाल ले जाएंगे, लेकिन राज्य और उसकी जनता को क्या मिलेगा, यह वाकई एक बड़ा सवाल है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed