फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   new chapter

एक नया अध्याय

Mon, 26 May 2014 08:57 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 26 May 2014 08:57 PM IST
विज्ञापन
new chapter

नरेंद्र दामोदरदास मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ ही देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। परंपराओं से इतर उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह को न केवल भव्य रूप दिया, बल्कि दक्षेस देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित कर उन्होंने सामंजस्य और दोस्ती की नई परंपरा भी डाल दी है। सांकेतिक होने के बावजूद उनका यह कदम दक्षिण एशिया की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। उनके इस कदम से तो उनके आलोचक ही नहीं, उनके समर्थक तक अचंभित होंगे।

विज्ञापन


बेशक विदेश नीति में एक दिन में बदलाव नहीं आ जाता, मगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ होने वाली उनकी मुलाकात से यदि दोनों देशों के ठंडे पड़े रिश्ते में गर्माहट आती है, तो इससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे। मगर यह मोदी भी जानते हैं कि इस वक्त घरेलू मोर्चे पर उनकी चुनौतियां कहीं अधिक बड़ी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने 'अधिकतम शासन और न्यूनतम सरकार' पर खासा जोर दिया था, जिसकी झलक उनके अपेक्षाकृत छोटे मंत्रिमंडल को देखकर की जा सकती है, जिसमें सिर्फ 24 कैबिनेट मंत्री, 11 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 10 राज्यमंत्री शामिल हैं।
विज्ञापन


वास्तव में सुरक्षा और विदेश नीति संबंधी अहम फैसलों को छोड़कर ढांचागत परियोजनाओं से संबंधित मामलों में सरकार के कम हस्तक्षेप के साथ ही संस्थागत सुधार की भी जरूरत है, और इसमें सबसे ऊपर तो सरकार की अपनी छवि ही होती है। दरअसल यूपीए सरकार के सत्ता से जाने के चाहे जितने भी कारण गिनाएं जाएं, लेकिन इसमें शायद ही किसी की असहमति हो कि पूर्ववर्ती सरकार जवाबदेही और निर्णय लेने के मामले में बेहद नाकाम साबित हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


मोदी सरकार को विरासत में तकरीबन ढाई सौ ठप पड़ी आधारभूत परियोजनाएं मिल रही हैं। इन परियोजनाओं में कोयला, लोहा, बिजली और सड़क से संबंधित बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं, जिसमें न केवल खरबों रुपये का निवेश है, बल्कि इनके ठप होने के कारण रोजगार के क्षेत्र में भी हलचल नहीं हो रही है। इसके अलावा महंगाई के मोर्चे पर भी यूपीए की नाकामी के कारण लोगों की नए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम से काफी अपेक्षाएं हैं। उनकी कार्यशैली से वाकिफ लोग जानते हैं कि मोदी सरकार का समय अब शुरू हो चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed