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नया 'खलीफा'

Mon, 30 Jun 2014 07:31 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jun 2014 07:31 PM IST
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New 'Caliphate'

गृहयुद्ध से जूझ रहे इराक और सीरिया में सक्रिय इस्लामिक उग्रवादी संगठन आईएसआईएल ने अपने कब्जे वाले हिस्से को नया 'इस्लामिक राज्य' और अपने सरगना को मुसलमानों का नया 'खलीफा' घोषित कर पश्चिम एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया के सामने एक नए तरह की चुनौती पेश कर दी है।

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कुछ वर्ष पहले तक महज दो-ढाई हजार लड़ाकों वाले आईएसआईएल के इस ऐलान को भले ही उसके प्रचार का हथकंडा कहकर खारिज कर दिया जाए, मगर इस्लामिक जगत में हो रही इस उथल-पुथल की जड़ें काफी गहरी हैं। हालांकि अल कायदा से अलग हुए धड़े से तैयार किए गए आईएसआईएल के हिंसक तौर-तरीके बताते हैं कि इस नापाक संगठन के इरादे कुछ और ही हैं। वह दुनिया को 90 वर्ष पीछे ऑटोमन साम्राज्य के पतन से पहले के उस दौर में ले जाना चाहता है, जब ब्रिटेन और फ्रांस जैसी औपनिवेशिक ताकतों ने भौगोलिक सीमाएं नहीं खींची थीं!
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बेशक, यह कहना बहुत कठिन है कि हिंसा पर यकीन रखने वाले इस संगठन को इस्लामिक जगत का कितना समर्थन हासिल है, मगर उसकी यह हरकत अमेरिका और पश्चिम देशों की नाकामी को भी रेखांकित करती है। अमेरिका ने तानाशाह सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करने और लोकतंत्र की बहाली के लिए इराक पर हमला किया था, मगर जिस तरह से उसने अस्थिरता के बीच अपनी फौज वापस बुला ली, उससे वहां के हालत बद से बदतर होते चले गए। आज हालत यह हो गई है कि वहां की चुनी हुई सरकार बगदाद और उसके आसपास सिमट कर रह गई है और तेल के अर्थशास्त्र से चलने वाला यह देश कुर्द, शिया और सुन्नी बहुल इलाकों के रूप में तीन टुकड़ों में बंटने को तैयार है।
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यदि वहां संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी जल्दी हस्तक्षेप नहीं करती है, तो निश्चय ही हालात और बिगड़ सकते हैं। खासकर इसलिए क्योंकि इराक और सीरिया के सीमा के खुलने के बाद आईएसआईएल जॉर्डन तक अपनी पहुंच बना सकता है। वहां के हालात भारत के लिए भी चिंता का सबब हैं। इराक में अब भी दस हजार से अधिक भारतीय मौजूद हैं, जिनमें से 39 अगवा भारतीय नागरिक और 46 भारतीय नर्सें शामिल हैं। बेशक, नवनिर्वाचित एनडीए सरकार ने उनकी वापसी की पहल तेज कर दी है, लेकिन इसके लिए अरब देशों के अपने संपर्कों सहित जिस तरह के भी प्रयास हो सकते हैं, उसमें कदापि पीछे  नहीं रहना चाहिए।

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