फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Need permanent solution

स्थायी समाधान की जरूरत

Thu, 21 Aug 2014 07:57 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 21 Aug 2014 07:57 PM IST
विज्ञापन
Need permanent solution

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू की मौजूदगी में असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने सीमा संबंधी मसले को साझा रणनीति के जरिये सुलझाने की घोषणा की है। मगर जब तक दोनों राज्यों के बीच सीमा संबंधी विवाद का स्थायी समाधान नहीं तलाशा जाता, वहां स्थायी शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती।

विज्ञापन


वास्तव में पांच सौ किलोमीटर से भी अधिक लंबी सीमा का साझा करने वाले इन दोनों राज्यों के बीच सीमा संबंधी मसला बेहद जटिल है। असम जहां 1963 में नगालैंड के राज्य बनने के बाद तय सांविधानिक सीमा की बात कर रहा है, वहीं नगालैंड विवादित जमीन पर दावा करते हुए पारंपरिक सीमा की दुहाई देता आया है। गोलाघाट में उपजा ताजा तनाव ऐसी ही विवादित जमीन से जुड़ा हुआ है, जहां असम के आदिवासी और नगा गुट आमने-सामने हैं।
विज्ञापन


वास्तव में जब कभी इस तरह का छोटा-मोटा तनाव भी होता है, तो नगालैंड और असम के अलगाववादी और उग्रवादी गुट सक्रिय हो जाते हैं। निश्चय ही यह कानून-व्यवस्था का मामला है और इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है, लेकिन विवादित क्षेत्र में केंद्रीय बलों की मौजूदगी से स्थिति बदल जाती है। इसलिए इस मामले में राज्य सरकारों और केंद्र के बीच आपसी सहमति बेहद जरूरी है, खासकर इसलिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक पखवाड़े पहले जब गोलाघाट में तनाव शुरू हुआ था, उसी वक्त यदि कड़ाई से पेश आया जाता, तो वहां लोगों की जानें नहीं गई होतीं। अब भी वहां के हालात सुधरे नहीं हैं और विवादित क्षेत्र में रहने वाले दस हजार से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। यह क्षेत्र न तो ठीक से रेल संपर्क से जुड़ा हुआ है और न ही सड़क से। ऐसे में यदि अलगाववादी गुट आर्थिक नाकेबंदी पर उतर आएं, तो वहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें तक पूरा करना मुश्किल हो जाता है।


दरअसल बात सिर्फ असम और नगालैंड की नहीं, पूरे पूर्वोत्तर के विकास से भी जुड़ी हुई है। इसलिए सीमा संबंधी मसलों के समाधान और इस क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक रणनीति बनाने की जरूरत है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह मसला उठा भी है। लाख टके की बात यह है कि ऐसे किसी भी प्रयास में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed