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बढ़ा मोदी का कद

Mon, 01 Apr 2013 03:07 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 01 Apr 2013 03:07 PM IST
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narendra modi in bjp parliamentary board role

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपनी नई टीम चुनकर बहुत साफ संदेश दिया है कि पार्टी में वैचारिक संतुलन बनाए रखने के बजाय आगामी लोकसभा चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन उनके लिए कहीं अधिक महत्व रखता है।

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पार्टी पदाधिकारियों के चयन में हालांकि भौगोलिक से लेकर जातिवादी समीकरण बनाए रखा गया है, और युवाओं व स्त्रियों की भागीदारी पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजातियों की मौजूदगी है, अल्पसंख्यक समुदाय की, तो संघ से जुड़े लोगों की भी। लेकिन राजनाथ सिंह की नई टीम में जो चीज सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है, वह है नरेंद्र मोदी और उनके समर्थकों को मिला महत्व।
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पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था में नरेंद्र मोदी की वापसी बताती है कि अंदरूनी विरोधों के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आने और अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी के कदाचित सबसे दमदार नेता के रूप में पेश करने से नहीं रोका जा सकता।
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इसलिए छह साल बाद उन्हें न सिर्फ संसदीय बोर्ड में ससम्मान चुना गया है, बल्कि आखिरी वक्त पर शिवराज सिंह चौहान का पत्ता कटना बताता है कि मोदी के बढ़ते कद के कारण पार्टी की इस शीर्ष संस्था में दूसरा मुख्यमंत्री लाकर संतुलन बनाने की भी जरूरत नहीं रह गई है!

भाजपा में मोदी के बढ़ते कद का एक और सुबूत यह है कि आलोचनाओं के बावजूद विवादास्पद अमित शाह को महासचिव बनाया गया है, जो लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के लिए माहौल बनाएंगे। आक्रामक छवि वाले कम उम्र वरुण गांधी को महासचिव बनाए जाने के पीछे भी यही सोच है, हालांकि सच्चाई यह भी है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को अगर बेहतर प्रदर्शन करना है, तो राहुल गांधी और अखिलेश के टक्कर के दमदार युवा नेता वही हो सकते हैं।


राजनाथ सिंह को बेशक अपने मनमुताबिक टीम चुनने का पूरा हक है, फिर भी नई टीम में यशवंत सिन्हा और शांता कुमार जैसी उदार छवियों की गैरमौजूदगी का औचित्य ठहरा पाना मुश्किल होगा, खासकर तब, जब अमित शाह और वरुण गांधी जैसों के चयन का पार्टी में अभी से ही विरोध शुरू हो गया है। ऐसे में, लोकसभा चुनाव तो दूर, अभी कर्नाटक का विधानसभा चुनाव ही भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।

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