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झूठी शान के लिए जान

Thu, 20 Nov 2014 07:58 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 20 Nov 2014 07:58 PM IST
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Murder for false pride

परिवार की 'मर्यादा' बचाने के लिए मां-बाप द्वारा अपनी ही बेटी की हत्या करने का ताजा उदाहरण जितना मर्माहत करने वाला है, उतना ही स्तब्ध करने वाला तथ्य यह है कि ऑनर किलिंग की यह घटना देश की राजधानी में हुई है। अभिषेक और भावना की शादी में सगोत्र या अपने गांव का कोई मामला नहीं था, और न ही इनके विवाह ने किसी खाप पंचायत को कुपित किया था। इसके बावजूद लड़की के परिजनों ने दो बालिगों के विवाह, और उसके पंजीकरण की वैधता को ताक पर रखकर ठंडे दिमाग से शादी के तीन दिन बाद इस हत्या को जिस तरह अंजाम दिया, वह हमारी मध्यकालीन सोच का ही एक और निर्मम उदाहरण है।

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हालांकि बदलते समय के अनुरूप कुछ खाप पंचायतों की सोच में उदारता दिखी है, लेकिन इससे इन्कार नहीं कि अमूमन हमारी इसी सोच का कुछ खाप पंचायतें फायदा उठाती हैं। आर्थिक उदारीकरण और सामाजिक उन्नति के जिस दौर में भिन्न धर्मों और संस्कृतियों तक में विवाह करना संभव हो गया है, उस समय भिन्न जाति में शादी करने पर मौत की सजा देना बताता है कि हम समय से कितना पीछे चल रहे हैं। ऐसे मामलों में अमूमन लड़कियों को जिस तरह जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, वह तो और भी रेखांकित करने लायक है।
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इससे यह साबित होता है कि विकास की तमाम बातें करने के बावजूद हमारी सोच अब भी पितृसत्तात्मक ही है। राजधानी में यह घटना तब हुई है, जब थोड़े ही समय पहले ऑनर किलिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाने की केंद्र सरकार की पहल को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन मिला है; इन प्रांतों में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान भी हैं। ऑनर किंलिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाना अब समय की मांग है; चाहे किसी भी वजह से क्यों न हो, किसी को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती।
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ऑनर किलिंग के मौजूदा मामले में दोषी परिवारजनों को सख्त सजा देना इसीलिए जरूरी है, ताकि समाज में इसका संदेश जाए। अलबत्ता हमारी मध्यकालीन सोच पर सिर्फ कठोर कानून के जरिये अंकुश लगाना शायद ही संभव हो। इसके लिए सामाजिक सजगता की भी उतनी ही आवश्यकता है। समाज जागेगा, तो उन संस्थाओं के फरमान स्वतः बेमानी हो जाएंगे, जो संभावित कठोर कानून की आशंका से शादियों में गोत्र और जाति की पाबंदियां बनाए रखने की बातें कर रहे हैं।

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