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अमेरिका में मोदी
नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Sep 2015 07:56 PM IST
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प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी दूसरी यात्रा में नरेंद्र मोदी का अमेरिका में जैसा स्वागत हुआ है, और सिलिकॉन वैली के शीर्ष उद्यमियों ने उन पर जिस तरह भरोसा जताया है, वह आश्वस्त करता है। दरअसल पटेल समुदाय द्वारा आरक्षण की मांग से गुजरात में जैसा विवाद खड़ा हुआ था, उसकी आंच अमेरिका तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी, क्योंकि अमेरिका के कारोबारी जगत में पटेल समुदाय बेहद मजबूत स्थिति में है। लेकिन यह अच्छा हुआ कि पटेलों ने विरोध के बजाय भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करना जरूरी समझा।
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सिलिकॉन वैली में भी नरेंद्र मोदी को हाथोंहाथ लिया गया। गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई ने प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया अभियान का समर्थन किया है, तो मीडिया मुगल रुपर्ट मर्डोक ने उन्हें सबसे अच्छा प्रधानमंत्री बताया है। नरेंद्र मोदी के इस पांच दिवसीय अमेरिका दौरे के दरअसल दो अहम लक्ष्य हैं। एक तो भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति की तस्वीर सामने रखकर अमेरिकी उद्यमियों को भारत में निवेश के लिए प्रेरित करना, और दूसरा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में अपनी कूटनीतिक क्षमता का परिचय देना।
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अमेरिकी उद्यमी हालांकि विदेशी निवेश बढ़ने और क्रेडिट रेटिंग सुधरने को मोदी सरकार की उपलिब्ध मान रहे हैं, लेकिन जीएसटी पर गतिरोध और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर कदम पीछे खींचने के सरकार के कदम से वे पसोपेश में हैं। वे डिजिटल इंडिया, स्वच्छता अभियान और स्टार्ट अप जैसी पहल से प्रभावित तो हैं, लेकिन मानते हैं कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है। ऐसे में यह देखना है कि आर्थिक सुधार को प्राथमिकता बता रहे प्रधानमंत्री वस्तुतः अमेरिकी उद्यमियों को निवेश के लिए आकर्षित करने में कितने सफल हो पाते हैं।
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नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। एक तो सतत विकास सम्मेलन में उनके भाषण पर दुनिया की नजरें टिकी होंगी, जिसमें अगले डेढ़ दशक में दुनिया को गरीबी, भूख और असमानता से मुक्ति दिलाने की बात और उसमें भारत की भूमिका तय होनी है। तिस पर संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने की मंशा पाल रहे पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देने की परीक्षा भी होगी।