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परीक्षा से खिलवाड़
नई दिल्ली
Updated Tue, 16 Jun 2015 07:35 PM IST
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सर्वोच्च न्यायालय ने इस वर्ष की अखिल भारतीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एआईपीएमटी) को रद्द कर दोबारा कराने का आदेश दिया है, जिससे इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा के प्रबंधन की भारी खामियां उजागर हुई हैं। हैरत यह है कि परीक्षा में नकल का मामला सामने आने के बावजूद सीबीएसई किसी भी तरह की गड़बड़ी से इन्कार कर रहा था। लेकिन इस मामले को उजागर करने वाली हरियाणा पुलिस ने बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है।
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तीन मई को हुई इस प्रवेश परीक्षा में नकल के तार देखते ही देखते हरियाणा से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक जुड़ गए! छह लाख तीस हजार विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था, जिसमें मेडिकल और बीडीएस की कुल 3,200 सीटों के लिए चयन होना था। जांच से पता चला है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ देर के भीतर ही सात सौ विद्यार्थियों तक 'आनसर की' पहुंच चुकी थी। कल्पना की जा सकती है कि यदि यह साजिश उजागर नहीं होती, तो इस वर्ष 20 फीसदी से भी अधिक सीटों पर कैसे लोगों का चयन होता!
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देश की आबादी के अनुपात में पहले ही मेडिकल शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, ऐसे में उसकी प्रवेश परीक्षा में ऐसी गड़बड़ी सिर्फ यही बताती है कि हमारा तंत्र किस हद तक बीमार हो चुका है। हैरत नहीं होनी चाहिए कि इससे पहले उत्तर प्रदेश की संयुक्त मेडिकल परीक्षा और जामिया मिल्लिया की प्रवेश परीक्षा के पर्चे भी लीक हो चुके हैं, जिसकी वजह से हजारों परीक्षार्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया।
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एआईपीएमटी में जिस तरह से मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस और माइक्रोफोन जैस उपकरणों का इस्तेमाल कर नकल को अंजाम दिया गया, वह किसी पेशेवर गिरोह का काम लगता है। जाहिर है, इसके पीछे भारी पैसों का भी लेन-देन हुआ होगा। इस तरह डॉक्टरी की डिग्री हासिल करने वाले किस तरह का इलाज करते होंगे, कहने की जरूरत नहीं! वहीं दूसरी ओर अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का सपना देखने वालों के साथ तो यह सरासर खिलवाड़ है, क्योंकि उन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी। इसके साथ ही इस पर भी विचार करने की जरूरत है कि किसी भी तरह कामयाब होने की अंधी दौड़ आखिर कब तक जारी रहेगी।