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भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश
Updated Tue, 22 Jan 2013 11:26 PM IST
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राजनीति में भ्रष्टाचार जब आम आदमी को क्षुब्ध कर रहा है, तब हरियाणा में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ताकतवर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके विधायक पुत्र को मिली दस-दस साल की सजा भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सार्थक संदेश की तरह है। भारतीय राजनीति में मूल्यों के पतन की यह पराकाष्ठा ही है कि एक मुख्यमंत्री तीन हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में योग्यता सूची को दरकिनार कर पैसे लेकर अयोग्य लोगों को वरीयता देता है।
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इससे पहले भी हरियाणा का यह ताकतवर परिवार कई बार गलत वजहों से चर्चा में रहा है। विडंबना देखिए, उन्हें मिली सजा के बाद बहस इस पर हो रही है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिता-पुत्र शिरकत कर पाएंगे या नहीं। इस पूरे प्रसंग में इस विद्रूप को भुला दिया गया है कि पैसे के बूते भर्ती हुए हजारों अयोग्य शिक्षकों ने विगत बारह वर्षों में नौनिहालों को क्या सिखाया होगा।
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लिहाजा न्याय का तकाजा तो यही है कि उन फर्जी शिक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। यह मामला उदाहरण है कि अपने यहां शिक्षा के दिनोंदिन गिरते स्तर की वजह क्या है। वह तो तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार को रिश्वत राशि में प्रत्याशित हिस्सा नहीं मिला था, तभी वह योग्यता सूची की मूल प्रति लेकर चौटाला परिवार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय चले गए थे।
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अपने साथ हुए 'अन्याय' से क्षुब्ध होकर अगर वह अदालत को सच्चाई नहीं बताते, तो शायद इस घोटाले के बारे में पता भी नहीं चलता। राजनेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से अपने यहां न जाने, ऐसे कितने ही घोटालों को अंजाम दिया जाता होगा। ऐसे में अदालत ने संजीव कुमार को भी ठीक ही बराबर का दोषी माना।
दोषियों को मिली सजा सुखद है, लेकिन यह राज्य की उस हुड्डा सरकार को खुश होने का मौका नहीं देती, जो सामाजिक असुरक्षा और भ्रष्टाचार के कारण पहले ही चर्चा में है। हरियाणा में क्षेत्रीय क्षत्रपों का जिस तरह दबदबा है, उसे देखते हुए सतर्क रहना होगा कि अदालत का यह फैसला राज्य में उपद्रव की वजह न बनें। कानून ने अपना काम किया है, अब प्रशासन-व्यवस्था को ध्यान रखना होगा कि यह दंड एक नजीर की तरह दिखे।