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अधिकारी की नहीं मानी तो कोर्ट ने रुकवाई शादी
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Tue, 04 Nov 2014 02:00 AM IST
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कोर्ट ने खिड़वाली में एक नाबालिग लड़की की शादी पर रोक लगा दी है।
शादी 3 नवंबर यानी सोमवार को होनी थी। कोर्ट ने यह कार्रवाई जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर की ओर से दायर याचिका पर की है। 17 दिसंबर की मामले में अगली सुनवाई होगी।
जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर को 31 अक्तूबर को सूचना मिली थी कि खिड़वाली में एक नाबालिग की शादी की तैयारी की जा रही है।
शादी 3 नवंबर को होनी थी। गांव में जाकर जांच की तो पाया गया लड़की नाबालिग है और उसकी उम्र लगभग 17 साल है। अधिकारी ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी दी शादी स्थगित करने को कहा।
परिजन शादी करने की बात पर अडे़ रहे। परिवार की ओर से विवाह को स्थगित करने का उचित आश्वासन न मिलने पर संरक्षण अधिकारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। जेएमआइसी कीर्ति जैन ने याचिका पर लड़की के पिता को सोमवार को अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया।
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कोर्ट के नोटिस पर जिला संरक्षण अधिकारी एवं नाबालिग के परिजन सोमवार को अदालत में पेश हुए और पक्ष रखा। नाबालिग के परिजनों ने अदालत के समक्ष लड़की का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, लेकिन उसमें लड़की का नाम अलग था जबकि स्कूल प्रमाण पत्र में नाम कुछ और था। अदालत ने जन्म प्रमाण पत्र को विश्वास के लायक नहीं माना और शादी रोकने के अंतरिम आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
फंस सकते हैं बाराती और अतिथि भी
अधिकारी करमिंदर कौर ने बताया कि यदि अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद परिजन शादी करते हैं तो परिजनों व शादी में शामिल होने वाले अतिथियों व बारातियों के साथ दूल्हे पर भी एफआइआर दर्ज हो सकती है।
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शादी 3 नवंबर यानी सोमवार को होनी थी। कोर्ट ने यह कार्रवाई जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर की ओर से दायर याचिका पर की है। 17 दिसंबर की मामले में अगली सुनवाई होगी।
जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर को 31 अक्तूबर को सूचना मिली थी कि खिड़वाली में एक नाबालिग की शादी की तैयारी की जा रही है।
शादी 3 नवंबर को होनी थी। गांव में जाकर जांच की तो पाया गया लड़की नाबालिग है और उसकी उम्र लगभग 17 साल है। अधिकारी ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी दी शादी स्थगित करने को कहा।
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परिजन शादी करने की बात पर अडे़ रहे। परिवार की ओर से विवाह को स्थगित करने का उचित आश्वासन न मिलने पर संरक्षण अधिकारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। जेएमआइसी कीर्ति जैन ने याचिका पर लड़की के पिता को सोमवार को अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया।
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कोर्ट के नोटिस पर जिला संरक्षण अधिकारी एवं नाबालिग के परिजन सोमवार को अदालत में पेश हुए और पक्ष रखा। नाबालिग के परिजनों ने अदालत के समक्ष लड़की का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, लेकिन उसमें लड़की का नाम अलग था जबकि स्कूल प्रमाण पत्र में नाम कुछ और था। अदालत ने जन्म प्रमाण पत्र को विश्वास के लायक नहीं माना और शादी रोकने के अंतरिम आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
फंस सकते हैं बाराती और अतिथि भी
अधिकारी करमिंदर कौर ने बताया कि यदि अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद परिजन शादी करते हैं तो परिजनों व शादी में शामिल होने वाले अतिथियों व बारातियों के साथ दूल्हे पर भी एफआइआर दर्ज हो सकती है।