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... तो गांव-कस्बों को गोद लेकर निरक्षरों को साक्षर बनाएगा एमडीयू
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Tue, 28 Oct 2014 02:30 AM IST
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अब गांवों में रहने वाले निरक्षर भी साक्षर होंगे।
इसके लिए एमडीयू प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कुलपति एच.एस. चहल ने सभी संबद्ध कॉलेजों से गांव या कस्बों को गोद लेने को कहा है।
जो गांव या कस्बे गोद लिए जाएंगे, वहां के लोगों को विशेष स्वयंसेवकों की मदद से साक्षर किया जाएगा। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस संबंध में कोई अधिकृत निर्देश जारी नहीं किया है, लेकिन सोमवार को हुई बैठक में कुलपति ने प्राचार्यों से इस तरह का प्रयोग करने को कहा है।
एमडीयू प्रशासन ने सोमवार को परीक्षा सुधार की योजनाओं और सुझावों पर मंथन करने के लिए सभी संबद्ध कॉलेजों की बैठक बुलाई थी। इसमें 250 से ज्यादा प्राचार्य शामिल हुए थे। परीक्षा सुधारों की चर्चा के दौरान कुलपति चहल ने सभी प्राचार्यों से कहा, हर संबद्ध कॉलेज में एनएसएस, यूथ रेडक्रॉस समिति और एनसीसी यूनिटों के जरिये विशेष स्वयंसेवक तैयार किए जाएं। कॉलेज अपनी यूनिटों के माध्यम से या सीधे तौर पर गांव-कस्बों को गोद लें। फिर विशेष स्वयंसेवक इन गांवों के निरक्षरों को साक्षर करेंगे। यह स्वयंसेवक सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी माहौल तैयार करें। इस बात पर सभी ने सहमति जताई है। हालांकि योजना मूर्तरूप लेगी या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।
मिसाल बन जाएगा एमडीयू
यदि यह योजना परवान चढ़ी, तो प्रदेश का करीब आधा हिस्सा इस योजना से फायदा उठा सकेेगा। एमडीयू से करीब 600 कॉलेज संबद्ध हैं। ऐसे में यदि हर कॉलेज एक गांव या कस्बे को गोद लेकर यहां के निरक्षरों को साक्षर करेगा तो 600 गांव या कस्बों में कोई निरक्षर नहीं रहेगा। साथ ही इन स्थानों पर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी बड़ा समूह तैयार हो जाएगा। 50 फीसदी भी सफलता मिली तो एमडीयू देश भर की अन्य यूनिवर्सिटी के लिए मिसाल बन सकती है।
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इसके लिए एमडीयू प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कुलपति एच.एस. चहल ने सभी संबद्ध कॉलेजों से गांव या कस्बों को गोद लेने को कहा है।
जो गांव या कस्बे गोद लिए जाएंगे, वहां के लोगों को विशेष स्वयंसेवकों की मदद से साक्षर किया जाएगा। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस संबंध में कोई अधिकृत निर्देश जारी नहीं किया है, लेकिन सोमवार को हुई बैठक में कुलपति ने प्राचार्यों से इस तरह का प्रयोग करने को कहा है।
एमडीयू प्रशासन ने सोमवार को परीक्षा सुधार की योजनाओं और सुझावों पर मंथन करने के लिए सभी संबद्ध कॉलेजों की बैठक बुलाई थी। इसमें 250 से ज्यादा प्राचार्य शामिल हुए थे। परीक्षा सुधारों की चर्चा के दौरान कुलपति चहल ने सभी प्राचार्यों से कहा, हर संबद्ध कॉलेज में एनएसएस, यूथ रेडक्रॉस समिति और एनसीसी यूनिटों के जरिये विशेष स्वयंसेवक तैयार किए जाएं। कॉलेज अपनी यूनिटों के माध्यम से या सीधे तौर पर गांव-कस्बों को गोद लें। फिर विशेष स्वयंसेवक इन गांवों के निरक्षरों को साक्षर करेंगे। यह स्वयंसेवक सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी माहौल तैयार करें। इस बात पर सभी ने सहमति जताई है। हालांकि योजना मूर्तरूप लेगी या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।
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मिसाल बन जाएगा एमडीयू
यदि यह योजना परवान चढ़ी, तो प्रदेश का करीब आधा हिस्सा इस योजना से फायदा उठा सकेेगा। एमडीयू से करीब 600 कॉलेज संबद्ध हैं। ऐसे में यदि हर कॉलेज एक गांव या कस्बे को गोद लेकर यहां के निरक्षरों को साक्षर करेगा तो 600 गांव या कस्बों में कोई निरक्षर नहीं रहेगा। साथ ही इन स्थानों पर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी बड़ा समूह तैयार हो जाएगा। 50 फीसदी भी सफलता मिली तो एमडीयू देश भर की अन्य यूनिवर्सिटी के लिए मिसाल बन सकती है।
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