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मनोज मर्डर केस : गिरफ्तारी नहीं होने पर घेरा थाना

Fri, 25 Apr 2014 12:43 AM IST
बहल (भिवानी)
बहल (भिवानी) Updated Fri, 25 Apr 2014 12:43 AM IST
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ओबरा गांव में 19 मार्च को मनोज नामक युवक की हत्या के मामले में हत्याराें की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज करीब 20 से अधिक गांवों के लोगों ने बुधवार को थाने का घेराव किया।
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इस दौरान ग्रामीणों ने तोशाम-सुधीवास स्टेट हाईवे को भी करीब आधे घंटे तक जाम किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस व ग्रामीणों में हल्की झड़प भी हुई। पुलिस को चार मई तक आरोपियों की गिरफ्तारी का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो और भी कडे़ कदम उठाए जाएंगे।
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उल्लेखनीय है कि गांव ओबरा में होली खेलने के दौरान महिलाओं के बीच पटाखे बजाने को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हो गया था। इसी विवाद में गांव के ही मनोज नामक युवक की 19 मार्च को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ग्रामीणों ने 31 मार्च को ओबरा चौक जाम किया था। आठ अप्रैल को लोकसभा चुनाव का बहिष्कार का फैसला लिया था। मतदान के दिन कुल 1339 में से केवल 57 वोट ही डाले गए थे।
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अनाजमंडी में दिया धरना
20 से अधिक गांवों के लोग सुबह करीब 11 बजे बहल अनाजमंडी में एकत्रित हुए। यहां धरना दिया। मनोज ओबरा हत्याकांड संघर्ष समिति के आह्वान पर हुए धरने में अखिल भारतीय किसान सभा, जनसंघर्ष समिति बहल आदि सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। वक्ताओं ने मनोज हत्याकांड की कडे़ शब्दों में निंदा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। धरने की अध्यक्षता करते हुए पूर्व कैप्टन सोहनलाल ने कहा कि पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। मनोज की हत्या को 35 दिन बीत चुके है।

पुलिस ने पांच आरोपियों में से एक को गिरफ्तार नहीं किया। जो चार पकडे़ उनमें से भी दो को छोड़ दिया। यहां रोष जताने के बाद सभी जुलूस के रूप में थाने का घेराव करने निकले। प्रदर्शनकारी नए बस स्टैंड से मुख्य बाजार, पिलानी रोड, पुरानी अनाजमंडी होते हुए बहल थाने पहुंचे। यहां पहले से ही भारी संख्या में पुलिस बल किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तैनात था।

पुलिस ने घेरा बनाकर ग्रामीणों को रोका
ग्रामीणों ने जबरन थाने में घुसने का प्रयास किया जबकि पुलिस के जवान घेरा बनाकर उन्हें रोकने लगे। इस दौरान पुलिस व प्रदर्शनकारियों में हल्की झड़प भी हुई। थाने में प्रवेश नहीं होने के बाद प्रदर्शनकारी थाने के बाहर तोशाम-सुधीवास स्टेट हाइवे पर बैठ गए और जाम लगा दिया।

जाम के दौरान अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य अध्यक्ष शेरसिंह ने कहा कि हम अपनी मांग पुलिस के समक्ष रखने आए थे। लेकिन, पुलिस ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे हम कोई उपद्रव मचाने आए हो। बाद में संघर्ष समिति तथा अन्य मौजिज लोगों को डीएसपी लोहारू दलजीत आर्य ने बातचीत के लिए पुलिस थाने में बुलाया।

डीएसपी दलजीत आर्य, नायब तहसीलदार संतराम तंवर और संघर्ष समिति के बीच घंटेभर मामले पर बातचीत हुई। संघर्ष समिति ने सीधे तौर पर पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। बाद में पुलिस को चार मई तक का समय देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित समय में हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो और कडे़ कदम उठाए जाएंगे।

समिति प्रतिनिधियों ने एसपी के नाम ज्ञापन भी सौंपा। इस मौके पर पूर्व कप्तान सोहनलाल, रोडवेज कर्मचारी नेता रामफल देशवाल, दीवान सिंह, प्रताप ओबरा, संघर्ष समिति प्रधान हवासिंह ओबरा, किसान सभा के दयानंद पूनिया, डॉ. बलबीर सिंह ठाकन, अशोक आर्य एडवोकेट, सुशील नांगल आदि मौजूद थे।
बंद रहे ओबरा के बाजार
मनोज ओबरा हत्याकांड संघर्ष समिति के आह्वान पर ओबरा बस स्टैंड पर दिन भर कोई भी दुकान नहीं खुली। दुकान खोलने के बजाय ओबरा चौक के दुकानदार प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बहल पहुंचे। दुकानदार विकास तथा अन्य ने बताया कि ओबरा चौक के दुकानदारों की एकता हमेशा से रही है। पहले भी जब चौक पर लगातार कई चोरी की घटनाएं हुई थी तो ओबरा चौक पूर्ण रूप से बंद रहा था।
समिति चाहे तो पॉलिग्राफिक टेस्ट को तैयार
समिति ने जब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तो डीएसपी दलजीत आर्य ने कहा कि पुलिस पर भरोसा रखें। समय लगता है लेकिन अपराधी बच नहीं पाएंगे। मामले की जांच एसआईटी करेगी। लेकिन, संघर्ष समिति चाहती है तो पुलिस मामले की जांच स्टेट क्राइम को सौंपने को तैयार है। इसके अलावा पकड़े गए आरोपियों का नार्को टेस्ट भी करवाने को तैयार है। इस पर किसान सभा के राज्य सचिव दयानंद पूनिया ने कहा कि वे तो चाहते है कि आरोपी जल्द से जल्द गिरफ्तार हो।

पाजू प्रकरण पर लगे ‘शेम-शेम’ के नारे
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बहल पुलिस ने कभी किसी मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं की। शेरसिंह ने कहा कि जब उनकी गाड़ी को कुछ बदमाशों ने रोक कर लूटा था तब भी बहल पुलिस ने उनको शराब तस्कर बता दिया था। इसके अलावा पाजू प्रकरण में मृतक महिला की मौत को इत्तफाकिया मौत दिखाकर मामला निपटा दिया था। जन संघर्ष समिति के प्रदर्शन के बाद 18 दिन के बाद मौत की एफआईआर दर्ज की गई। इस पर लोगों ने शेम-शेम के नारे लगाए।


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