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फुटबॉल का महाकुंभ

Wed, 11 Jun 2014 07:49 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jun 2014 07:49 PM IST
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MahaKumbha of Football

सर्वाधिक लोकप्रिय खेलों में से एक फुटबॉल के विश्व कप की शुरुआत ही अपने आप में उल्लास का अवसर है, तिस पर इसका मेजबान देश इस बार वह ब्राजील है, जिसके खून में फुटबॉल रचा-बसा है। फुटबॉल का जन्मदाता देश भले इंग्लैंड हो, पर इस खेल को कलात्मक सौंदर्य तो दक्षिण अमेरिका ने ही दिया है, ब्राजील जिसका सिरमौर है। छोटे-छोटे पास, मुग्ध करने वाली ड्रिब्लिंग और लक्ष्य के पास पहुंचकर अचूक निशानेबाजी के जरिये ब्राजील के खिलाड़ी जिस खेल का परिचय देते हैं, वह यूरोप की ताकतवर फुटबॉल शैली से अलग तो है ही, इस खेल को आकर्षक भी बनाती है।

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ऐसे देश का विश्व कप फुटबॉल की मेजबानी करना एक ऐतिहासिक घटना है; हालांकि यह भी उतना ही देखने लायक है कि विकास, समान अवसर और वेतन वृद्धि की मांग करती ब्राजीली जनता इस ऐतिहासिक आयोजन का विरोध कर रही है। यह विश्व कप कई अर्थों में अनूठा और फुटबॉल की कई चर्चित और संभावनाशील प्रतिभाओं के खेल का गवाह होगा।
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इसी विश्व कप में पहली बार गोललाइन तकनीक का इस्तेमाल होने जा रहा है, जिससे गोल होने-न होने की संदिग्धता खत्म हो जाएगी। जर्मनी के मिरोस्लोव क्लोसे इस विश्व कप में अगर एक भी गोल करते हैं, तो वह ब्राजील के रोनाल्डो के पंद्रह गोलों का रिकॉर्ड तोड़ सर्वाधिक गोल करने वाले बन जाएंगे। वैसे तो अनेक चर्चित और युवा खिलाड़ियों से उम्मीदें हैं, लेकिन मुख्य रूप से जिन पर नजर रहेगी, वे हैं, लियोनेन मैसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, वायने रूनी और नेमार। इनमें भी नेमार पर दबाव सबसे अधिक होगा, क्योंकि चौंसठ साल पहले इसी ब्राजील को उसकी जमीन पर उरुग्वे ने फाइनल में हराया था, और अब चैंपियन बनकर उस कटु स्मृति को मिटाने का ऐतिहासिक मौका ब्राजील के पास है।
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विश्व कप में भारत उत्साही दर्शक की भूमिका में ही रहता है, पर जो चार एशियाई देश इस विश्व कप में भाग ले रहे हैं, वे अगर अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल रहे, तो भारत में फुटबॉल की संभावना की वह जमीन और उर्वर हो सकती है, जिसकी झलक पिछले दिनों मिजोरम के युवा फुटबॉलरों में मिली। ऐसे में यही उम्मीद करनी चाहिए कि   फुटबॉल को समर्पित अगला एक महीना विवादों से दूर रोमांच, उत्साह और खेल भावना से भरा होगा।

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