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जिंदगी की जंग लड़ रहा अपनों का ठुकराया मासूम
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Tue, 28 Oct 2014 02:13 AM IST
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दो दिन का एक मासूम पीजीआई के वार्ड-5 जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
इस बच्चे को सोमवार को गुड़गांव के एक अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया है।
बच्चे का मलद्वार नहीं होने से उसे गुड़गांव के खांडा रोड पर झाड़ियों में फेंक दिया गया था, जहां मासूम को चूहों ने नोंच डाला।
पीजीआई में बच्चे का ऑपरेशन करके उसका अस्थाई मलद्वार बनाया गया है। पीजीआई स्टाफ के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर हुक्कू इसकी देखभाल में लगे हैं।
सुधीर हुक्कू ने बताया कि सुबह आठ बजे खांडा रोड से गुजर रही नर्स मोनिका की नजर इस बच्चे पर पड़ी। वह उसे प्राइवेट अस्पताल के चाइल्ड केयर यूनिट में ले आई।
जांच करने पर पता चला कि बच्चे का मलद्वार नहीं है। पुलिस को इसकी सूचना देने और प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। हेडकांस्टेबल प्रेमचंद्र उसे लेकर यहां पहुंचा और जनसेवा संस्थान के माध्यम से पीजीआई में दाखिल कराया।
जगह-जगह से नोंच डाला चूहों ने
सड़क किनारे झाड़ियों में फेंके जाने के बाद चूहों ने बच्चे के बांये हाथ के अलावा उसे कई जगहों से नोंच डाला है। इस वजह से बच्चे को दो जगह टांके भी लगाने पड़े।
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जागी जिंदगी की आस
पीजीआई में डॉ. के.एन. रतन ने बच्चे का कुछ टेस्ट कराने के बाद शाम 6:30 बजे ऑपरेशन से उसका अस्थायी मलद्वार बना दिया है। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बनी हुई है।
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इस बच्चे को सोमवार को गुड़गांव के एक अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया है।
बच्चे का मलद्वार नहीं होने से उसे गुड़गांव के खांडा रोड पर झाड़ियों में फेंक दिया गया था, जहां मासूम को चूहों ने नोंच डाला।
पीजीआई में बच्चे का ऑपरेशन करके उसका अस्थाई मलद्वार बनाया गया है। पीजीआई स्टाफ के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर हुक्कू इसकी देखभाल में लगे हैं।
सुधीर हुक्कू ने बताया कि सुबह आठ बजे खांडा रोड से गुजर रही नर्स मोनिका की नजर इस बच्चे पर पड़ी। वह उसे प्राइवेट अस्पताल के चाइल्ड केयर यूनिट में ले आई।
जांच करने पर पता चला कि बच्चे का मलद्वार नहीं है। पुलिस को इसकी सूचना देने और प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। हेडकांस्टेबल प्रेमचंद्र उसे लेकर यहां पहुंचा और जनसेवा संस्थान के माध्यम से पीजीआई में दाखिल कराया।
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जगह-जगह से नोंच डाला चूहों ने
सड़क किनारे झाड़ियों में फेंके जाने के बाद चूहों ने बच्चे के बांये हाथ के अलावा उसे कई जगहों से नोंच डाला है। इस वजह से बच्चे को दो जगह टांके भी लगाने पड़े।
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पीजीआई में डॉ. के.एन. रतन ने बच्चे का कुछ टेस्ट कराने के बाद शाम 6:30 बजे ऑपरेशन से उसका अस्थायी मलद्वार बना दिया है। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बनी हुई है।