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उपभोक्ता को चपत लगा रहा नेट बैंकिंग ठग गैंग

Fri, 18 Apr 2014 01:07 AM IST
rewari
rewari Updated Fri, 18 Apr 2014 01:07 AM IST
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बैंक अधिकारी बनकर एटीएम कार्ड नंबर और पिन नंबर पूछकर खाते से रकम निकालने वाले गैंग सक्रिय हैं।
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उपभोक्ता इस गिरोह के झांसे में आ रहे हैं। पुलिस भी इस गिरोह तक नहीं पहुंच पा रही। कस्बा की एक महिला शिक्षक के खाते से भी ठगों ने खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए।

जिले में नेट बैंकिंग के ठगी के मामले बढ़ते जा रहे है। एक माह के दौरान यह गिरोह 10 उपभोक्ताओं के खाते से 67 हजार रुपये निकाल चुका हैं। गनीमत यह रही कि करीब 20 उपभोक्ता ऐसे थे जिनके खाते में बैलेंस कम होने पर खाते से राशि नहीं निकाल सके।
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गिरोह में शामिल सदस्य ग्राहकों की समस्याओं के बारे में जानकारी लेकर उनके पास फोन करते हैं। सवाल यह उठता है गिरोह के पास बैंक  में की जाने वाली शिकायतों की जानकारी कैसे पहुंच रही है। बुधवार को महिला शिक्षक अंकिशा ने बताया कि उसके एटीएम कार्ड पर नाम गलत है।
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 इसके बाद उन्होंने कार्ड में दर्ज नाम को ठीक कराने के लिए बैंक में शिकायत की थी। बुधवार को उसके पास किसी का फोन आया। फोन करने वाले बताया कि उनके एटीएम कार्ड में नाम गलत दर्ज है। आरोपी ने सभी जानकारी हासिल करने के बाद खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए।

अभी तक हुए ठगी के मामले

-16 फरवरी बैक से इंद्रजीत के खाते से 8 हजार निकाले
-16 फरवरी बैंक से महिला अंशिका के खाते 6  हजार निकाले
-17 फरवरी बैंक से भूप सिंह के खाते से 16 हजार निकाले
-22 फरवरी बैंक से नलीमा के खाते से तीन हजार निकाले
-3 मार्च को बैंक से अनीता के खाते से एक हजार निकाले
-7 मार्च को अंजू देवी के खाते से दो हजार निकाले
-8 मार्च को सुनीता के खाते से 30 रुपये निकाले
-6 अप्रैल को जैनाबाद के पंच से 6 हजार निकाले
-15 अप्रैल को कोसली के किसान के खाते से 15 हजार निकाले

इस तरह लेते हैं जानकारी

ठग गिरोह मौका मिलते ही खाते से एक साथ ही सारा धन निकाल लेते हैं।  वह पहले बैंक कर्मी के नाम से उपभोक्ताओं के पास फोन करते हैं। वह उपभोक्ताओ को पहले एटीएम का खाता नंबर फिर उसके परिवार के बार में बात करते किसी न किसी बहाने से पिन नंबर पूछ लेते है।

 पिन नंबर मिलते ही नेट बैंकिंग से राशि ट्रांसफार्मर कर लेते है। जब पैसा उनके खाते से निकासी हो जाता है तब मोबाइल में आने वाले संदेश के माध्यम से ही जानकारी मिलती है और उसके ठग गिरोह के मोबाइल बंद हो जाते हैं।


उपभोक्ता सेवा शिविर से भी नहीं हुए जागरूक

बैंक इन ठग गिरोह की बढ़ती वारदातों के बाद कई बार शिविर लगाकर उपभोक्ताओं को जागरूक कर चुके हैं फिर भी कुछ उपभोक्ता इन गिरोह के शिकार बन जाते हैं और उन्हें अपना गोपनीय पीन नंबर बता देते हैं।

जागरूकता ही है बचाव
लोगों को जागरूक होना चाहिए। वह किसी को अपना पिन नम्बर न बताएं। इस तरह गिरोह के नंबराें की जांच जारी है ताकि ऐसे गिरोह का खुलासा हो सके।
संदीप पूनिया, थाना पुलिस प्रभारी
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