{"_id":"596a5f0d4f1c1bf7038b464d","slug":"land-for-textile-park","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेक्सटाइल पार्क को मिली जमीन ","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
टेक्सटाइल पार्क को मिली जमीन
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Sat, 15 Jul 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
टेक्सटाइल पार्क के गेट का स्केच।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद। शहर में चल रहे प्रिंटिंग कारोबार को गति देने के लिए सरकार की ओर से सकारात्मक पहल शुरू हो गई है। इसके चलते मोहम्मदाबाद के सकवाई में बनने वाले टेक्सटाइल पार्क की भूमि यूपीएसआईडीसी को आवंटित कर दी गई है।
विज्ञापन
नौ वर्ष पूर्व टैक्सटाइल पार्क को अस्तित्व में लाने के लिए जमीन आवंटन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सकवाई में छपाई कारखानों को एक जगह लगाने के लिए 35 एकड़ जमीन खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। समाज कल्याण विभाग की भूमि को 13 जुलाई को 6,52,26000 रुपये का ड्राफ्ट जमा कर यूपीएसआईडीसी के नाम दाखिल खारिज कर दिया गया है। आईआईए फर्रुखाबाद के अध्यक्ष रोहित गोयल ने बताया कि यूपीएसआईडीसी से यदि जमीन का आवंटन इस माह तक टेक्सटाइल पार्क के नाम हो जाता है तो अक्तूबर में पार्क के निर्माण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि 40 करोड़ रुपये पार्क के भवन निर्माण में और 20-30 करोड़ रुपये ड्रेनेज आदि सुविधाओं को बनाने में खर्च होंगे। जमीन का रुपये यूपीएसआईडीसी को 12 साल में वापस करना होगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 50 उद्यमियों को पार्क में काम शुरू करने के लिए जमीन का आवंटन किया जाएगा। इससे ज्यादा उद्यमियों के आने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
-
पार्क बनने से 10 गुना बढ़ेगा टर्नओवर
फर्रुखाबाद। रोहित गोयल ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क लगने से छपाई कारोबार पूरी साल चल सकेगा। इससे सालाना टर्नओवर 500 करोड़ से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये हो जाएगा। कहा कि पांच साल के बाद छपाई उद्योग का टर्नओवर 10 गुना बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये सालाना होगा। इससे जिले के लोगों को अधिक कारोबार मिल सकेगा। अभी छपाई कारोबार साल में छह माह ही चल पाता है। बरसात के मौसम में नमी के कारण दो माह, सर्दियों में धूप न होने के कारण कपड़ा सुखाने में दिक्कत आती है। माघ माह में मेला रामनगरिया में कल्पवास के दौरान छपाई कारखानों को बंद रखा जाता है। इससे कारखानों में काम करने वाले श्रमियों के साथ-साथ उद्यमियों को नुकसान होता है। बताते चलें कि शहर में इस समय 200 छोटी-बड़ी छपाई की इकाइयां कार्यरत हैं।