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एशियाड में भारत का सफर

Fri, 03 Oct 2014 06:53 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 03 Oct 2014 06:53 PM IST
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Journey to India in Asiad

कबड्डी में पुरुषों और महिलाओं के फाइनल में दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही इंचियोन एशियाड में भारत का सफर खत्म हो गया। हालांकि अंतिम पदक तालिका में भारत की स्थिति का पता तो उस वक्त चलेगा, जब एशियाड का समापन होगा। मगर भारत की स्थिति गुआंगझू में हुए पिछले एशियाड से बेहतर नहीं कही जा सकती, जहां उसे 14 स्वर्ण सहित कुल 65 पदक मिले थे। भारत को इस बार 11 स्वर्ण सहित कुल 57 पदकों से संतोष करना पड़ा है।

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इसके बावजूद इस एशियाड ने भारतीयों को खुश होने के अनेक मौके दिए हैं। खासकर भारतीय हॉकी टीम ने अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पराजित कर देश को स्वर्ण पदक दिलाया, बल्कि इसके साथ ही वह रियो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी क्वालीफाई हो गई है। सरदार सिंह और उनकी टीम की यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बीते कुछ वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। पिछले ओलंपिक की तो बात ही छोड़िए, इसी वर्ष हुए विश्व कप तक में टीम को नौवें स्थान से संतोष करना पड़ा था!
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जहां तक व्यक्तिगत स्पर्धा की बात है, तो जबर्दस्त हौसलों वाली मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम ने स्वर्ण पदक जीतकर मिसाल कायम की है। पांच बार की विश्व चैंपियन और तीन बच्चों की मां मैरी कॉम की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। दूसरी ओर एक अन्य महिला मुक्केबाज एल सरिता देवी के साथ जो कुछ हुआ, उससे बचा सकता था। अच्छा हुआ कि खुद सरिता ने कांस्य पदक स्वीकार कर अपनी गलती मान ली। वास्तव में भारतीय दल के कर्ताधर्ता अपनी ओर से पहल करते, तो ऐसी अप्रिय स्थिति आती ही नहीं। बेशक चार गुणा चार सौ रिले में महिला टीम ने दबदबा कायम रखा है, मगर दमखम वाली 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में हम कहीं नहीं हैं। वहीं इस एशियाड में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले निशानेबाज जीतू राय ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा दिखाई है।
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इसके साथ ही सोचने वाली बात यह भी है कि भारत पदक तालिका में चीन, कोरिया या जापान जैसे एशियाई दिग्गजों ही नहीं, ईरान, कजाकिस्तान और थाईलैंड जैसे छोटे देशों से भी पीछे है। इस एशियाड ने फिर यह सोचने को मजबूर किया है कि हम ऐसे खिलाड़ी तैयार क्यों नहीं कर पा रहे, जिनके दम पर हम अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदकों का सैकड़ा लगा सकें।

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