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मीडिया पर भड़के जिंदल, कैमरामैन से बदसलूकी की
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 10 Sep 2012 06:01 PM IST
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कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) के रायगढ़ संयंत्र का मामला सामने आने पर नवीन जिंदल की मुश्किलें बढ़ गई है। एक पत्रकार के सवाल पर कांग्रेस सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल भड़क गए। संबंधित टीवी चैनल के मुताबिक उन्होंने कैमरामैन के साथ बदसलूकी भी की।
जिंदल के इस व्यवहार की कई राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की है। जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव ने जिंदल के व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वहीं, भाजपा ने जिंदल को माफी मांगने को कहा है। हालांकि केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ किया है कि यदि जिंदल ग्रुप के खिलाफ कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी।
माना जा रहा है कि जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) के रायगढ़ संयंत्र का मामला सामने आने पर पैदा हुई स्थितियां सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है क्योंकि विरोधी दल इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं बिजली उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि रायगढ़ का यह कोयला ब्लॉक बहुत बेहतर गुणवत्ता के कोयले का ब्लॉक है और उसमें कोयले की कीमत करीब 700 से 800 रुपये प्रति टन के आसपास ही आ रही है।
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इसके चलते इस 1000 मेगावाट के संयंत्र में बिजली उत्पादन की लागत 2.10 रुपये से 2.25 रुपये प्रति यूनिट के बीच रहने का अनुमान है। जबकि इससे तैयार हो रही बिजली बाकी कंपनियों से महंगी बेची गई। कई बार तो इसे आठ रुपये यूनिट तक बेचा गया है।
इस संयंत्र ने किसी भी राज्य के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) नहीं किया है जबकि कोयला ब्लॉक रियायत के आधार पर किया गया है। यही वजह है कि इसका मुनाफा काफी ज्यादा रहा है। हालांकि कंपनी के प्रवक्ता ने अमर उजाला को बताया कि उनकी कंपनी ने अधिकतम छह रुपये यूनिट पर ही बिजली बेची है और आधी बिजली राज्य बिजली बोर्ड को कम दाम पर बेची रही है।
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जिंदल के इस व्यवहार की कई राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की है। जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव ने जिंदल के व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वहीं, भाजपा ने जिंदल को माफी मांगने को कहा है। हालांकि केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साफ किया है कि यदि जिंदल ग्रुप के खिलाफ कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी।
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माना जा रहा है कि जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) के रायगढ़ संयंत्र का मामला सामने आने पर पैदा हुई स्थितियां सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है क्योंकि विरोधी दल इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं बिजली उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि रायगढ़ का यह कोयला ब्लॉक बहुत बेहतर गुणवत्ता के कोयले का ब्लॉक है और उसमें कोयले की कीमत करीब 700 से 800 रुपये प्रति टन के आसपास ही आ रही है।
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इसके चलते इस 1000 मेगावाट के संयंत्र में बिजली उत्पादन की लागत 2.10 रुपये से 2.25 रुपये प्रति यूनिट के बीच रहने का अनुमान है। जबकि इससे तैयार हो रही बिजली बाकी कंपनियों से महंगी बेची गई। कई बार तो इसे आठ रुपये यूनिट तक बेचा गया है।
इस संयंत्र ने किसी भी राज्य के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) नहीं किया है जबकि कोयला ब्लॉक रियायत के आधार पर किया गया है। यही वजह है कि इसका मुनाफा काफी ज्यादा रहा है। हालांकि कंपनी के प्रवक्ता ने अमर उजाला को बताया कि उनकी कंपनी ने अधिकतम छह रुपये यूनिट पर ही बिजली बेची है और आधी बिजली राज्य बिजली बोर्ड को कम दाम पर बेची रही है।