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बॉलीवुड से जुड़े तार

Tue, 21 May 2013 09:20 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 21 May 2013 09:20 PM IST
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आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के सिलसिले में टेलीविजन के चर्चित चेहरे विंदू दारा सिंह की गिरफ्तारी ने इस आशंका को पुख्ता ही किया है कि इस काले धंधे की जड़ बहुत गहराई तक फैली हुई है। इससे यह भी साफ हुआ है कि ग्लैमर के व्यवसाय से जुड़े लोग ही फिक्सिंग के धंधे में शामिल हैं।

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आईपीएल में क्रिकेट के नाम पर जिस तरह तमाशा शुरू हुआ, खिलाड़ियों की जिस तरह बोलियां लगीं और भारी धनराशि से टीमों की फ्रेंचाइजी जिस तरह खरीदी गई, उसी से आभास मिलने लगा था कि इसमें सब कुछ पाक-साफ नहीं है।
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बेशक आईपीएल में भाग ले रहे तमाम क्रिकेटर फिक्सिंग में शामिल नहीं हैं, क्रिकेट के इस त्वरित संस्करण ने कई नई प्रतिभाओं को सामने लाने का काम भी किया है, लेकिन सच यह है कि आईपीएल के हिस्से में बदनामी ही ज्यादा आई है।
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और इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ही जिम्मेदार है, जो आईपीएल के जरिये अपना खजाना भरने में तो लगा रहा, लेकिन काले धंधे का सच सामने आने के बाद उसने हाथ खड़े कर दिए!

यह सही है कि आईपीएल से पहले भी क्रिकेट में फिक्सिंग की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्रिकेट के जिस आयोजन में पैसा और ग्लैमर इतना अधिक है, जिसकी टीमों के खरीदार अमीर व रसूखदार लोग हैं, क्रिकेट के जिस संस्करण को काले धन को सफेद करने का जरिया बताया जा रहा था, उसमें फिक्सिंग पर नजर रखने की व्यवस्था पहले ही क्यों नहीं की गई।

यह कहा ही जा रहा है कि आईपीएल में फिक्सिंग के पीछे दाऊद इब्राहिम जैसों का मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। अब आईपीएल में हर टीम की भ्रष्टाचार-विरोधी इकाई गठित करने और खिलाड़ियों की जांच की व्यवस्था को सख्त करने की जो बात कही जा रही है, वह पहले भी हो सकती थी।


आईपीएल को बंद करना समाधान नहीं है, पर इसमें फिक्सिंग के समानांतर तंत्र को कतई चलने नहीं दिया जा सकता। अब जब एक बार जांच शुरू हुई है, तो आईपीएल में व्याप्त काले धंधे की न सिर्फ हर कोण से पड़ताल होनी चाहिए, बल्कि दोषियों को दंडित करने की प्रतिबद्धता भी दिखानी पड़ेगी।

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