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जांच पर आंच
नई दिल्ली
Updated Mon, 18 Feb 2013 11:24 PM IST
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इटली की रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनी फिनमेकानिका की ब्रिटिश सहयोगी अगस्ता वेस्टलैंड से अतिविशिष्ट लोगों की आवाजाही के लिए खरीदे जाने वाले हेलीकॉप्टर के सौदे के बारे में एक बात स्पष्ट है कि इस सौदे में दलाली की बात अपने देश की किसी जांच एजेंसी या किसी अन्य निगरानी संस्था ने उजागर नहीं की है। यदि इटली में यह मामला उजागर नहीं होता, तो कहना मुश्किल है कि यह बात हमारे यहां सामने भी आ पाती?
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इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि बोफोर्स तोप सौदे में दलाली पिछले 25 वर्षों से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भले बनी रही हो, हमारी प्रतिरक्षा संबंधी खरीद व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया है, उसमें किसी तरह की पारदर्शिता नहीं दिखती।
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निश्चय ही रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की मिसाल कायम की है, और अपनी वर्तमान जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने संदिग्ध लगने वाले कुछ रक्षा सौदों को रद्द भी किया है। मसलन, उन्होंने तत्परता के साथ अगस्ता वेस्टलैंड को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
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मगर सवाल उनकी ईमानदारी का नहीं, यूपीए सरकार के सामूहिक उत्तरदायित्व का है, जिसमें एक बार फिर इस सरकार ने निराश किया है। इस हेलीकॉप्टर खरीद ने व्यवस्था की उस खामी की ओर भी इशारा किया है, जिसमें सरकार और वायुसेना (या व्यापक रूप में सेना) की जिम्मेदारियों और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर टकराव नजर आता है। सवाल सीबीआई जांच की विश्वसनीयता और उसकी क्षमता का भी है।
मुश्किल यह है कि यह मामला बजट सत्र के ऐन पहले सामने आया है, इसलिए यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। बेशक इस मुद्दे पर संसद में बहस हो, जैसा कि खुद प्रधानमंत्री ने कहा है। मगर यह मामला लगातार उलझता ही जा रहा है, क्योंकि एक-एक कर इसमें कई दलालों, अनेक कंपनियों, यहां तक कि उद्योग घरानों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं।
इसलिए जरूरत इस सौदे में हुई दलाली के सच को उजागर करने की है। इसके लिए इटली पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि वहां हो रही जांच के दस्तावेज लाए जा सकें और दोषी लोगों तक पहुंचा जा सके। सौदे को रद्द भर कर देने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।