राजनीति में कूदे पाक परमाणु बम के जनक

इसलामाबाद/एजेंसी Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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पाकिस्तान के बदनाम परमाणु वैज्ञानिक ए क्यू खान राजनीति के मैदान में कूद गए हैं और उन्होंने ‘तहरीक ए तहाफुज पाकिस्तान’ नाम से नई पार्टी बनाई है। खान ने बताया कि आगामी आम चुनाव से पहले देश के युवाओं को जागरूक करने की उनकी योजना है।
ईमानदार लोगों को चुने युवाः एक्यू खान
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार खान ने कहा कि उनकी युवाओं को इस बारे में जागरूक करने की योजना है कि किसे वोट दिया जाए और किसे नहीं दिया जाए। उन्होंने कहा, ‘मैं युवाओं से आगामी चुनावों में ईमानदार लोगों को चुनने और देश के अस्तित्व के लिए खडे़ होने का आग्रह करुंगा।’

जनता के बीच जाते दिख रहे थे खान
ए क्यू खान को वर्ष 2004 में उस समय नजरबंद कर दिया गया था जब उन्होंने स्वीकार किया कि वह गोपनीय परमाणु प्रसार कार्यक्रम में शामिल थे, जिससे उत्तर कोरिया और लीबिया जैसे देशों को परमाणु हथियारों से संबंधित जानकारी हासिल हुई। खान द्वारा हाल में अदालत में मामले दायर किए जाने के बाद वर्तमान सरकार ने उन पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है और वह हाल के महीनों में जनता के बीच जाते दिखे हैं।

'पीएमएल-एन और पीपीपी को नहीं दें वोट'
उन्होंने दावा किया कि पारंपरिक राजनीतिक दल अपने वायदों पर खरे उतरने में विफल रहे हैं। खान ने कहा कि उनकी पार्टी युवाओं से आग्रह करेगी कि वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पीएमएल-एन जैसी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को वोट नहीं दें। रिपोर्ट में कह गया है कि नई पार्टी को अभी लोगों के बीच थोड़ा सा ही राजनीतिक आधार मिला है।

एक उद्यमी के फंड से चलेगी खान की पार्टी
वहीं पाक के राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ए क्यू खान के लिए देश के लोगों में काफी सम्मान है, इसलिए उनका वोट बैंक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खान ने हाल ही में इसी सिलसिले में पूर्व सेना प्रमुख मिर्जा असलम बेग, पीओके के पूर्व प्रधानमंत्री सरदार अतीक अहमद खान और कुछ केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात की है। खान की पार्टी में राष्ट्रवादी लोगों खासकर युवाओं की जुड़ने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार देश के उद्यमी खान की पार्टी को फंड उपलब्ध करा रहे हैं। पार्टी फेसबुक पर अपना पेज पहले ही लांच कर चुकी है। ए क्यू खान तहरीक-ए-इंसाफ पाकिस्तान पार्टी के प्रमुख इमरान खान के काफी करीबी माने जाते रहे हैं।

अब्दुल कादिर खान
जन्म : एक अप्रैल, 1936 को भोपाल में
-1952 में उनका परिवार भारत से पाकिस्तान चला गया
-नीदरलैंड के अलमेलू के यूरेनको संयंत्र में 1975 तक काम किया
-1974 में भारत के पहले परमाणु विस्फोट के बाद पाक लौटे
-यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज के ब्लूप्रिंट और यूरेनको के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी भी चोरी छिपे पाक लाए
-1976 में जुल्फिकार अली भुट्टों ने उन्हें यूरेनियम संवर्धन का काम सौंपा

दागदार छवि
ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया समेत कई देशों तक फैलाया परमाणु तस्करी का जाल साथ ही परमाणु तकनीक संबंधी ब्लूप्रिंट बेचे। तकरीबन 1.5 टन यूरेनियम हेक्साफ्लूराइड गैस लीबिया को दी। पुष्टि के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों द्वारा परमाणु तस्करी संबंधी सुबूत देने के बाद पाक सरकार ने 2004 में उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया था, फरवरी, 2009 में रिहा किए गए।

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