{"_id":"13080","slug":"international-13080","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाक में ‘माई लार्ड’ के खिलाफ याचिका","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
पाक में ‘माई लार्ड’ के खिलाफ याचिका
लाहौर/एजेंसी
Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद के वकील एके डोगर ने पाकिस्तान की ऊपरी अदालतों में सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा जजों को ‘माई लार्ड’ नाम से संबोधित किए जाने की व्यवस्था को चुनौती देते हुए इसके खिलाफ लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
अपनी याचिका में डोगर ने कहा है कि पाकिस्तान लीगल डिसीजन 1981 में मुद्रित राष्ट्रपति आदेश के पैरा नंबर चार में साफ तौर पर उल्लेखित किया गया है कि वकीलों द्वारा जजों के लिए संबोधित किए जाने वाले शब्द ‘माई लार्ड’ या ‘योर लार्डशिप’ शब्दों का इस्तेमाल अब आगे नहीं किया जाएगा, इसकी जगह अब सिर्फ ‘सर’ या जनाब-ए-वाला और जनाब-ए-आली और संवाददाताओं द्वारा मिस्टर जस्टिस जैसे शब्दों का संबोधन किया जाएगा।
उन्होंने अदालत से कहा कि वह केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, पाकिस्तान बार काउंसिल और लाहौर हाई कोई बार एसोसिएशन को राष्ट्रपति के इस आदेश को मानने के लिए के कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपनी याचिका में डोगर ने कहा है कि पाकिस्तान लीगल डिसीजन 1981 में मुद्रित राष्ट्रपति आदेश के पैरा नंबर चार में साफ तौर पर उल्लेखित किया गया है कि वकीलों द्वारा जजों के लिए संबोधित किए जाने वाले शब्द ‘माई लार्ड’ या ‘योर लार्डशिप’ शब्दों का इस्तेमाल अब आगे नहीं किया जाएगा, इसकी जगह अब सिर्फ ‘सर’ या जनाब-ए-वाला और जनाब-ए-आली और संवाददाताओं द्वारा मिस्टर जस्टिस जैसे शब्दों का संबोधन किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने अदालत से कहा कि वह केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, पाकिस्तान बार काउंसिल और लाहौर हाई कोई बार एसोसिएशन को राष्ट्रपति के इस आदेश को मानने के लिए के कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी करे।
विज्ञापन