फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   important-role-of-indian-scientist-in-curiosity-landing

‘क्यूरियोसिटी’ की लैंडिंग में वैज्ञानिक घोष का अहम रोल

Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
ह्यूस्टन/एजेंसी
ह्यूस्टन/एजेंसी Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
important-role-of-indian-scientist-in-curiosity-landing
अंतरिक्ष को खंगालने में जुटे वैज्ञानिकों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा। अंतरिक्ष यान ‘क्यूरियोसिटी’ को सफलतापूर्वक मंगल पर उतराने वाली नासा की टीम में भारतीय वैज्ञानिक अमिताभ घोष का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विज्ञापन


सफलता से खुश घोष ने बताया कि यह क्षण हजारों लोगों के पांच-छह साल की मेहनत के बाद आया है। अगर यह यान क्रैश हो जाता तो फिर उसके बाद कुछ नहीं बचता। हमें इस क्रेटर में परतों जैसी संरचना भी दिखी। क्यूरियोसिटी रोवर के सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की सतह पर उतरने को असाधारण और अद्भूत उपलब्धि करार देते हुए भारतीय अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने भी इसकी सराहना की है।
विज्ञापन


अब लाल ग्रह के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है। दो साल के अपने अभियान के दौरान क्यूरियोसिटी रोवर पता लगाने में मदद करेगा कि क्या मंगल पर कभी जीवन था और क्या वहां भविष्य में जीवन की कोई संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय समयानुसार सुबह 11.00 बजे रोवर ने लाल ग्रह की ऊबड़ खाबड़ सतह को छुआ। उतरने के कुछ क्षण बाद ही क्यूरियोसिटी ने कई तस्वीरें भी पृथ्वी पर भेज दीं। 2.5 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ क्यूरियोसिटी गेल क्रेटर में एक पहाड़ की तलहटी में उतरा। इस पहाड़ की ऊंचाई करीब पांच किलोमीटर और व्यास 154 किमी है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के इंजीनियर ऐलन चेन ने अमेरिका के इस सबसे उन्नत और सबसे विशाल रोवर के सुरक्षित उतरने का ऐलान किया। यह रोवर कार के आकार का और एक टन वजनी है। मंगल के हल्के वातावरण में नीचे उतरने के दौरान के 7 मिनट क्यूरियोसिटी के लिए बेहद खतरनाक माने जा रहे थे।

रोवर की सफल लैंडिंग के साथ ही क्यूरियोसिटी मिशन का संचालन करने वाली नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) के वैज्ञानिक खुशी से उछल पड़े। कई वैज्ञानिकों की आंखों में खुशी के आंसू भी छलक पड़े। नासा एडमिनिस्ट्रेटर चार्ल्स बोल्डेन ने कहा कि क्यूरियोसिटीअब मंगल पर जीवन को लेकर हमारे सवालों का जवाब खोजेगा।

माना जा रहा है कि मंगल को समझने, वहां जीवन खासतौर पर सूक्ष्म जीवों की तलाश की दिशा में क्यूरियोसिटीकी खोज एक क्रांतिकारी कदम होगी। इस रोवर से अंतरिक्ष में और अहम मिशनों का रास्ता भी खुल गया है। मंगल से चट्टान या मिट्टी के अंश पृथ्वी पर लाने और बाद में कभी मानव को अंतरिक्ष पर भेजने की पहल भी हो सकती है। क्यूरियोसिटी ने पृथ्वी से मंगल ग्रह तक की 56.7 करोड़ किलोमीटर तक की दूरी आठ महीनों से कुछ अधिक समय में पूरी की है। इसे पिछले साल नवंबर में छोड़ा गया था।



रोवर पर 10 वैज्ञानिक उपकरण
इनमें कुछ उपकरणों को पहली बार ही मंगल पर भेजा गया है। इनमें एक लेजर फायरिंग उपकरण शामिल है, जो दूर से ही ठोस चट्टानों को पिघला सकता है। नमूने लेने के लिए एक रोबोटिक बांह और एक ड्रिल भी है। नमूनों की जांच रोवर पर मौजूद लैब में ही होगी। रोवर को ऊर्जा देने के लिए इसमें परमाणु ईंधन प्लूटोनियम से चलने वाली एक आरटीजी बैटरी लगाई गई है।

इस रोवर पर 17 कैमरे लगे हैं। आरईएमएस उपकरण मंगल के तापमान, वहां चलने वाली हवाओं की गति और दिशा तथा वायुदाब और अल्ट्रावायलेट किरणों के बारे में पृथ्वी पर रिपोर्ट भेजेगा। 3 दशक के बाद नासा का पहला ऐसा मंगल अभियान है जो वहां जीवन के लिए तमाम जरूरी परिस्थितियों का पता लगाने का काम करेगा।


क्यों था डर
मंगल पर भेजे गए अभियानों में से लगभग 70 फीसदी नाकाम रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिकों को क्यूरियोसिटी के वहां सुरक्षित उतर पाने को लेकर भारी चिंता थी।

क्यों चुना गेल क्रेटर
गेल क्रेटर में बने पहाड़ में मंगल के इतिहास के बारे में बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारियां कैद हैं। इस पहाड़ की हर परत मंगल के इतिहास के एक अलग अध्याय की कहानी कहती है। क्यूरियोसिटी अपने बेहद अत्याधुनिक यंत्रों की मदद से इन परतों का विश्लेषण करेगा।

सूर्य से मंगल की दूरी
मंगल की सूर्य से औसत दूरी लगभग 23 करोड़ किलोमीटर और कक्षीय अवधि 687 दिवस है। मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है।

-मंगल ग्रह पर अमेरिका ने इतिहास रच दिया है। नासा के अभियान ने साबित कर दिया है कि अमेरिका के लिए मुश्किल लक्ष्य भी नामुमकिन नहीं है।
-बराक ओबामा, अमेरिका राष्ट्रपति
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed