'एक न एक दिन असद को जाना ही होगा'

अलेप्पो/संयुक्त राष्ट्र/ एजेंसी Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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कोफी अन्नान के सीरिया के लिए अंतरराष्ट्रीय शांतिदूत के पद से इस्तीफा देने से महाशक्तियों के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सीरिया पर प्रतिबंध संबंधी प्रस्ताव पर जिस तरह हाल ही में सुरक्षा परिषद में वीटो पॉवर बटे थे, ठीक वही झलक अन्नान के इस्तीफे की घोषणा के बाद दिखाई दी। हालांकि भारत ने कहा है कि वह सीरिया में शांति के प्रयासों को जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र-अरब लीग के दूत कोफी अन्नान को इस पद पर बनाए रखना पसंद करता।

अमेरिका ने अन्नान के इस्तीफे के लिए रूस और चीन को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं चीन और रूस ने भी अन्नान के इस्तीफे पर अफसोस तो जताया है। उधर एक रिपोर्ट के अनुसार पद छोड़ने की घोषणा कर चुके अन्नान ने कहा है कि एक न एक दिन सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को जाना ही होगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत अन्नान के प्रयासों का प्रबल समर्थक रहा है। अन्नान ने बृहस्पतिवार को अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। पुरी ने कहा कि भारत ने उनकी छह सूत्री शांति योजना का निरंतर समर्थन किया है।

पुरी ने पीटीआई से कहा, ‘सीरिया में शांति लाने के लिए अन्नान ने जो प्रयास किए, उसके लिए हम उनके बहुत आभारी हैं। हम उन्हें पद पर बनाए रखना पसंद करते। हम उन परिस्थितियों को समझते हैं जिनमें उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है।’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सीरिया में अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकता और उसे 20 अगस्त को सीरिया में संयुक्त राष्ट्र निगरानी मिशन के लिए तय सीमा खत्म होने के मद्देनजर प्रबंध करने होंगे। अन्नान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून को सूचित किया कि 31 अगस्त की तय समयसीमा पूरी होने के बाद वह अपने पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।

सीरिया में शांति के प्रयासों के मद्देनजर इसी साल फरवरी में अन्नान को दूत नियुक्त किया गया था। वह संयुक्त राष्ट्र के महासचिव भी रह चुके हैं। उधर अमेरिका ने कोफी अन्नान के इस्तीफे के लिए चीन और रूस को जिम्मेदार ठहराया है। इन दोनों देशों ने ही हाल में सुरक्षा परिषद में सीरिया संबंधी प्रस्ताव के विरोद में वीटो पॉवर का इस्तेमाल किया था। हालांकि भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि पाकिस्तान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। इस मतदान में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्यों ने मतदान किया था।

अपने वक्तव्य में बान की मून ने कहा कि सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निरंतर मतभेद हैं जिसके चलते वीटो अधिकार वाले सदस्य देश सीरिया के बारे में सहमति नहीं बना पाएं हैं और यही मतभेद कूटनीति की राह में रुकावट डाल रहे हैं जिसकी वजह से किसी भी मध्यस्थ का काम और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। सीरिया पर प्रस्तावों को वीटो करने वाले रूस ने कहा है कि उसे कोफी अन्नान के फैसले का अफसोस है।

संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विटाली चुरकिन ने कहा कि रूस ने हमेशा कोफी अन्नान का समर्थन किया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष मार्च से सरकार विद्रोही प्रदर्शनों के शुरू होने से अब तक लगभग 20,000 लोग मारे गए हैं, साथ ही हजारों लोग सुरक्षा कारणों से सीरिया छोड़कर भाग चुके हैं।

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