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अफगान, पाक, इराक पर आतंक की ज्यादा मार
वाशिंगटन/एजेंसी
Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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अमेरिकी संस्था ‘नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर’ की रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि वर्ष 2011 के दौरान दुनिया भर के देशों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और इराक सबसे ज्यादा आतंकी हमलों का शिकार हुए हैं। हालांकि 2010 के मुकाबले 2011 में इस प्रकार की वारदातों में कमी आई है।
रिपोर्ट कहती है कि इन हमलों की यह भी एक सच्चाई है कि इनमें मरने वालों में अधिकतर मुसलिम थे। आतंकरोधी मामलों के विशेष दूत डेनियल बेंजामिन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं को बताया कि वर्ष 2011 के दौरान 70 देशों में दस हजार से अधिक आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 12,500 लोगों की जान गई। लेकिन यह आंकड़ा भले ही कितना ज्यादा हो, वर्ष 2010 की तुलना में इस प्रकार के हमलों में 12 फीसदी की कमी आई है।
बेंजामिन ने कहा कि हालांकि यह बात गौर करने लायक है कि अफगानिस्तान और इराक में पिछले वर्ष की तुलना में आतंकवादी हमलों में कमी आई है। यह कमी अफगानिस्तान के संबंध में 14 फीसदी, इराक के मामले में 16 फीसदी रही। शीर्ष अमेरिकी आतंकवाद विरोधी अधिकारी ने आतंकवाद पर 2011 की रिपोर्ट जारी करने के मौके पर यह बात कही।
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उन्होंने बताया कि अफ्रीका में वर्ष 2011 में 978 आतंकवादी हमले हुए और यह पिछले साल के मुकाबले 11.5 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अफ्रीका में इस प्रकार के हमलों के पीछे नाइजीरिया स्थित आतंकवादी समूह बोको हराम का हाथ रहा, जिसने वर्ष 2011 में ऐसे 136 हमलों को अंजाम दिया।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले होने की खबरें दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के आसपास के इलाकों से मिली हैं। दुनियाभर में आतंकवादी हमलों में इन इलाकों में सर्वाधिक 75 फीसदी लोग मारे गए। आतंकवादी हमलों की पीड़ा मुस्लिमों को सबसे अधिक सहनी पड़ी। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन देशों अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में अधिकतर आतंकवादी हमले हुए और दुनिया भर में आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों में से 85 फीसदी लोग इन्हीं देशों से ताल्लुक रखते थे। विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 65 फीसदी था।
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रिपोर्ट कहती है कि इन हमलों की यह भी एक सच्चाई है कि इनमें मरने वालों में अधिकतर मुसलिम थे। आतंकरोधी मामलों के विशेष दूत डेनियल बेंजामिन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं को बताया कि वर्ष 2011 के दौरान 70 देशों में दस हजार से अधिक आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 12,500 लोगों की जान गई। लेकिन यह आंकड़ा भले ही कितना ज्यादा हो, वर्ष 2010 की तुलना में इस प्रकार के हमलों में 12 फीसदी की कमी आई है।
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बेंजामिन ने कहा कि हालांकि यह बात गौर करने लायक है कि अफगानिस्तान और इराक में पिछले वर्ष की तुलना में आतंकवादी हमलों में कमी आई है। यह कमी अफगानिस्तान के संबंध में 14 फीसदी, इराक के मामले में 16 फीसदी रही। शीर्ष अमेरिकी आतंकवाद विरोधी अधिकारी ने आतंकवाद पर 2011 की रिपोर्ट जारी करने के मौके पर यह बात कही।
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उन्होंने बताया कि अफ्रीका में वर्ष 2011 में 978 आतंकवादी हमले हुए और यह पिछले साल के मुकाबले 11.5 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अफ्रीका में इस प्रकार के हमलों के पीछे नाइजीरिया स्थित आतंकवादी समूह बोको हराम का हाथ रहा, जिसने वर्ष 2011 में ऐसे 136 हमलों को अंजाम दिया।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले होने की खबरें दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के आसपास के इलाकों से मिली हैं। दुनियाभर में आतंकवादी हमलों में इन इलाकों में सर्वाधिक 75 फीसदी लोग मारे गए। आतंकवादी हमलों की पीड़ा मुस्लिमों को सबसे अधिक सहनी पड़ी। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन देशों अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में अधिकतर आतंकवादी हमले हुए और दुनिया भर में आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों में से 85 फीसदी लोग इन्हीं देशों से ताल्लुक रखते थे। विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 65 फीसदी था।