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गैर इसलामिक बनेगा मिस्र का पीएम
काहिरा/एजेंसी
Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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मिस्र के नव निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी किसी गैर इसलामिक व्यक्ति को अपना प्रधानमंत्री बना सकते हैं। मुर्सी देश में सभी धर्मों के लोगों की समावेशी सरकार बनाने के इच्छुक हैं। प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदारों में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अलबरदेई और एक वामपंथी नेता का नाम आगे बताया जा रहा है। देश का पहला लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुने जाने के एक दिन बाद से ही मुर्सी ने नई सरकार के गठन को लेकर प्रयास तेज कर दिया है, जो कमाल गंजूरी की कैबिनेट से अधिकार ग्रहण करेगा।
मिस्र के नए राष्ट्रपति सभी वर्गों के लोगों को खुश करने के लिए मध्य मार्ग पर चल रहे हैं। सेना के साथ उन्होंने सिविल प्रशासन के अधिकार को लेकर समझौता भी किया है। उप राष्ट्रपति पद पर नियुक्ति को लेकर भी बात चल रही है हालांकि मुर्सी ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे विभिन्न क्षेत्रों से आए तीन उप राष्ट्रपतियों की नियुक्ति करेंगे। इसमें एक या तो महिला, ईसाई या पूर्व राष्ट्रपति उम्मीदवार शामिल होगा।
अल अहराम के हवाले से मिस्र के अखबार अल शोरूक ने खबर दी है कि भविष्य में सरकार का नेतृत्व ऐसे राजनेता के हाथ में होगा जो मुसलिम ब्रदरहुड का सदस्य नहीं है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री पद के लिए संभावित दावेदारों में अलबरदेई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जियाद बहाईद्दीन का नाम बताया गया है। अशांति के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुर्सी अपनी कैबिनेट में टेक्नोक्रेट को भी शामिल करना चाहते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल जनवरी में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से देश का विशाल पर्यटक बाजार चौपट हो गया है, विदेशी निवेशकों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं।
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मुर्सी की राह में हैं मुश्किलें
मिस्र मीडिया की कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि सशस्त्र सेनाओं की शीर्ष परिषद (सैन्य परिषद) गृह, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास रख सकती है। खबर यह भी है कि राजनीतिक गतिरोध को कम करने के लिए कार्यकर्ता अलबरदेई मुसलिम ब्रदरहुड और सैन्य परिषद के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
दूसरी तरफ मुर्सी को अभी राष्ट्रपति पद की शपथ लेना बाकी है पर उन्हें कौन और कहां शपथ दिलाएगा, इस पर विवाद और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। 30 मार्च के संवैधानिक घोषणा के अनुसार नव निर्वाचित राष्ट्रपति को संसद के समक्ष शपथ लेना चाहिए। जबकि संसद भंग होने की स्थिति में उच्च संवैधानिक न्यायालय के समक्ष शपथ लेने की बात कही जा रही है।
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मिस्र के नए राष्ट्रपति सभी वर्गों के लोगों को खुश करने के लिए मध्य मार्ग पर चल रहे हैं। सेना के साथ उन्होंने सिविल प्रशासन के अधिकार को लेकर समझौता भी किया है। उप राष्ट्रपति पद पर नियुक्ति को लेकर भी बात चल रही है हालांकि मुर्सी ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे विभिन्न क्षेत्रों से आए तीन उप राष्ट्रपतियों की नियुक्ति करेंगे। इसमें एक या तो महिला, ईसाई या पूर्व राष्ट्रपति उम्मीदवार शामिल होगा।
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अल अहराम के हवाले से मिस्र के अखबार अल शोरूक ने खबर दी है कि भविष्य में सरकार का नेतृत्व ऐसे राजनेता के हाथ में होगा जो मुसलिम ब्रदरहुड का सदस्य नहीं है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री पद के लिए संभावित दावेदारों में अलबरदेई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जियाद बहाईद्दीन का नाम बताया गया है। अशांति के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुर्सी अपनी कैबिनेट में टेक्नोक्रेट को भी शामिल करना चाहते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल जनवरी में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन से देश का विशाल पर्यटक बाजार चौपट हो गया है, विदेशी निवेशकों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं।
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मुर्सी की राह में हैं मुश्किलें
मिस्र मीडिया की कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि सशस्त्र सेनाओं की शीर्ष परिषद (सैन्य परिषद) गृह, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास रख सकती है। खबर यह भी है कि राजनीतिक गतिरोध को कम करने के लिए कार्यकर्ता अलबरदेई मुसलिम ब्रदरहुड और सैन्य परिषद के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
दूसरी तरफ मुर्सी को अभी राष्ट्रपति पद की शपथ लेना बाकी है पर उन्हें कौन और कहां शपथ दिलाएगा, इस पर विवाद और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। 30 मार्च के संवैधानिक घोषणा के अनुसार नव निर्वाचित राष्ट्रपति को संसद के समक्ष शपथ लेना चाहिए। जबकि संसद भंग होने की स्थिति में उच्च संवैधानिक न्यायालय के समक्ष शपथ लेने की बात कही जा रही है।