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26/11 जैसे और हमले का खतरा!
लंदन/एजेंसी
Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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भारत में मुंबई हमले की तरह के एक और हमले की आशंका से इनकार नहीं करते हुए एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने कहा है कि यदि तालिबान या हक्कानी नेटवर्क दक्षिणी अफगानिस्तान में कब्जा जमाने में सफल हो गए तो इस प्रकार का खतरा पैदा हो जाएगा। पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी ने कहा, ‘ कई राज्यों में आंतरिक सुरक्षा संगठनों के आधुनिकीकरण और सुधार तथा खुफिया मामलों में समन्वय बेहतर होने के मद्देनजर, लश्कर ए ताइबा और जैश ए मोहम्मद की ओर से पेश होने वाले खतरों को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है लेकिन मुंबई हमले की तरह के एक और हमले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।’
यहां क्वीन ऐलिजाबेथ कांफ्रेंस सेंटर में ‘एशिया की सुरक्षा 2012’’ में ‘भारत में आतंकवाद का अनुभव और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखते हुए पार्थसारथी ने कहा, ‘भारत अब जिन मुख्य आतंकवादी चुनौतियों का सामना करेगा, वे अफगानिस्तान के घटनाक्रम से उभरेंगी और वह भी उस स्थिति में जब तालिबान और हक्कानी नेटवर्क दक्षिणी अफगानिस्तान के बडे़ हिस्सों पर कब्जा करने में सफल हो जाता है।’
नई दिल्ली में सेंटर फोर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ फेलो पार्थसारथी ने कहा, ‘तालिबान पहले भी हरकत उल मुजाहिदीन जैसे भारत विरोधी समूहों को प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराता रहा है।’ उन्होंने कहा कि कंधार विमान अपहरण मामले में भी उनकी भूमिका रही है और हाल ही में अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क ने भारतीय निर्माण परियोजनाओं और राजनयिक तथा वाणिज्यिक मिशनों पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफगानिस्तान की धरती आतंकवादियों की शरणस्थली नहीं बने।
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यहां क्वीन ऐलिजाबेथ कांफ्रेंस सेंटर में ‘एशिया की सुरक्षा 2012’’ में ‘भारत में आतंकवाद का अनुभव और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखते हुए पार्थसारथी ने कहा, ‘भारत अब जिन मुख्य आतंकवादी चुनौतियों का सामना करेगा, वे अफगानिस्तान के घटनाक्रम से उभरेंगी और वह भी उस स्थिति में जब तालिबान और हक्कानी नेटवर्क दक्षिणी अफगानिस्तान के बडे़ हिस्सों पर कब्जा करने में सफल हो जाता है।’
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नई दिल्ली में सेंटर फोर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ फेलो पार्थसारथी ने कहा, ‘तालिबान पहले भी हरकत उल मुजाहिदीन जैसे भारत विरोधी समूहों को प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराता रहा है।’ उन्होंने कहा कि कंधार विमान अपहरण मामले में भी उनकी भूमिका रही है और हाल ही में अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क ने भारतीय निर्माण परियोजनाओं और राजनयिक तथा वाणिज्यिक मिशनों पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफगानिस्तान की धरती आतंकवादियों की शरणस्थली नहीं बने।
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