अमेरिका के आगे नहीं झुका भारत, तालिबान ने सराहा

काबुल/एजेंसी Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
india-not-knuclkle-before-United-States-Taliban-happy
एक बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम में अफगान तालिबान ने भारत को क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देश बताते हुए सराहना की है। तालिबान ने कहा है कि नई दिल्ली ने अफगानिस्तान में सैन्य दखल से संबंधित अमेरिकी अपील और दबाव के सामने नहीं झुक कर अच्छा काम किया है।

आतंकी संगठन ने अपने एक बयान में कहा है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत इलाके का एक अहम देश है। वह अफगान लोगों की आकांक्षाओं, उनके विश्वास और आजादी के प्रति उनकी चाहत से अवगत है। यह बिल्कुल ही अतार्किक होगा कि भारत अमेरिका की खुशी के लिए खुद को मुश्किल में डाले।

अफगान तालिबान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का करीबी और अफगानिस्तान में भारतीय हितों पर हमला वाला माना जाता है। आतंकी संगठन ने अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा को काबुल खाली हाथ भेजने के लिए भारत की सराहना की है।

मुल्ला उमर के नेतृत्व वाले तालिबान ने कहा है कि हाल ही में अपने भारत दौरे के दौरान पनेटा नई दिल्ली को इस बात के लिए प्रोत्साहित करते रहे कि वह अफगानिस्तान में और अधिक सक्रिय हो क्योंकि 2014 तक ज्यादातर विदेशी सैनिक देश छोड़ कर चले जाएंगे लेकिन वह किसी तरह की कामयाबी हासिल करने में असफल रहे।

तालिबान ने कहा है कि नई दिल्ली में तीन दिनों तक पनेटा यह कोशिश करते रहे कि वह अपना बोझ भारत के कंधों पर डाल दें ताकि वह अफगानिस्तान से बाहर निकलने का रास्ता पा सकें। अमेरिकी रक्षा मंत्री नई दिल्ली के दौरे के बाद काबुल गए थे। 2001 में अफगानिस्तान की सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद कट्टरपंथी आतंकी गुट अमेरिकी नेतृत्व वाली नाटो सेनाओं के साथ खूनी जंग कर रहा है।

आतंकी संगठन ने कहा है कि कुछ विश्वसनीय मीडिया सूत्रों ने कहा है कि भारत अधिकारियों ने पनेटा की मांग को तवज्जो नहीं दी और उन्होंने स्वतंत्र रुख को प्रकट किया क्योंकि भारतीयों को पता है कि अमेरिकी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। बयान में कहा गया है, भारतीय अवाम और उसकी सरकार अफगानिस्तान में पिछले 12 सालों से चल रहे युद्ध को अवैध महसूस करते हैं तथा वे अफगान राष्ट्र एवं उसकी मांगों से भी वाकिफ हैं।


अफगान गृह युद्ध के दौरान भारत ने तालिबान के खिलाफ नार्दर्न गठबंधन को अपनी मदद दी थी लेकिन 1996 में आतंकी गुट के सत्ता पर आने बाद अफगानिस्तान से दूर हट गया था। तालिबान संबंधित आतंकी गुट खासकर हक्कानी नेटवर्क बार-बार भारतीय हितों को निशाना बनाते रहे हैं।

2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर किए गए घातक हमले में 58 लोग मारे गए थे और 141 अन्य घायल हो गए थे। तालिबान ने अपने बयान में कहा है कि संप्रभुता, बराबरी और आपसी सम्मान और एक दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी तरह की दखल नहीं के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंधों का इच्छुक है।

अफगानिस्तान में भारत की भूमिका
भारत अफगानिस्तान में सबसे बड़े दानदाताओं में से एक है। भारत अफगान संसद से लेकर हाईवे के निर्माण समेत नागरिक प्रोजेक्टों पर करीब 2 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। भारत नागरिक क्षेत्रों में सहायता कर रहा है लेकिन वह अफगानिस्तान में सैन्य मौजूदगी से बचता रहा है। हालांकि भारत अपने यहां के सैन्य संस्थाओं में अफगान सैन्य अधिकारियों के छोटे समूहों के लिए कोर्स चला रहा है।

Spotlight

Most Read

Other Archives

शहरियों ने कटा दी नाक, सिर्फ 58.89 फीसदी मतदान

बिंदकी समेत अन्य ने की पूरी मेहनत, रहे अव्वल हथगाम ने इस बार भी बाजी मारी, पांच फीसदी उछला

30 नवंबर 2017

Other Archives

35 घायल

28 नवंबर 2017

Related Videos

VIDEO: चंडीगढ़ का ये चेहरा देख चौंक उठेंगे आप!

‘द ग्रीन सिटी ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर चंडीगढ़ में आकर्षक और खूबसूरत जगहों की कोई कमी नहीं है। ये शहर आधुनिक भारत का पहला योजनाबद्ध शहर है। लेकिन इस शहर को खूबसूरत बनाये रखने वाले मजदूर कैसे रहते हैं यह देख आप हैरान हो जायेंगे।

22 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper