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सुरक्षा एजेंसियों से पाक सुप्रीम कोर्ट नाराज
इसलामाबाद/एजेंसी
Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बलूचिस्तान प्रांत में कानून एवं व्यवस्था की समस्या पर शीर्ष जनरल की टिप्पणी पर गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने आगाह किया कि सेना प्रमुख को भी अदालत में तलब किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बिना किसी आरोप के हिरासत में लिए लोगों के बारे में मुख्य न्यायाधीश ने सुरक्षा एजेंसियों के वकील राजा इरशाद से कहा, ‘आरोपियों पर मुकदमा चलाएं, उनकी हत्या न करें।’
शीर्ष अदालत ने लापता लोगों अथवा सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बिना किसी आरोप के लोगों को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई। क्वेटा में दो जून को फ्रंटियर कोर के महानिरीक्षक मेजर जनरल ओबैदुल्लाह खान खट्टक द्वारा बुलाई गई प्रेसवार्ता पर अदालत ने कड़ी आलोचना की और कहा कि एक सैन्य अधिकारी को पत्रकारों से बात नहीं करनी चाहिए थी। अदालत ने साफ कहा कि प्रेसवार्ता कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट यह जानना चाहती है कि संवैधानिक सरकार की भूमिका क्या थी।
उन्होंने आगाह किया कि शीर्ष अदालत सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को बुलाकर उनसे पूछेगी कि देश को कैसे चलाया जाना चाहिए और वे क्या कर सकते हैं। गौरतलब है कि प्रेसवार्ता के दौरान मेजर जनरल खट्टक ने दावा किया था कि बलूच नागरिक प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं और राज्य संस्थाओं को बदनाम करने के अभियान को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने बलूचिस्तान में अशांति के लिए विदेशी एजेंसियों को दोषी ठहराया था। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में तीन जजों की पीठ बलूचिस्तान से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
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मुख्य न्यायाधीश ने माना कि बलूचिस्तान में स्थिति खतरनाक और अस्थिर है। उन्होंने कहा कि फ्रंटियर कोर के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और उन लोगों के शव पाए गए, जिन्होंने अर्द्ध सैनिक बल के खिलाफ सबूत मुहैया कराए। पीठ ने कहा कि बलूचिस्तान में पिछले दो से तीन दिनों के दौरान करीब 20 लोगों की हत्या कर दी गई। पीठ के सदस्य जस्टिस जव्वाद ख्वाजा ने यह भी कहा, ‘हम सुरक्षा एजेंसियों के दुश्मन नहीं हैं और ना ही एजेंसियां हमारी दुश्मन हैं। हम उन्हें क्रेडिट देने को तैयार हैं पर उन्हें वैसा काम करना चाहिए।’
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शीर्ष अदालत ने लापता लोगों अथवा सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बिना किसी आरोप के लोगों को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई। क्वेटा में दो जून को फ्रंटियर कोर के महानिरीक्षक मेजर जनरल ओबैदुल्लाह खान खट्टक द्वारा बुलाई गई प्रेसवार्ता पर अदालत ने कड़ी आलोचना की और कहा कि एक सैन्य अधिकारी को पत्रकारों से बात नहीं करनी चाहिए थी। अदालत ने साफ कहा कि प्रेसवार्ता कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट यह जानना चाहती है कि संवैधानिक सरकार की भूमिका क्या थी।
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उन्होंने आगाह किया कि शीर्ष अदालत सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को बुलाकर उनसे पूछेगी कि देश को कैसे चलाया जाना चाहिए और वे क्या कर सकते हैं। गौरतलब है कि प्रेसवार्ता के दौरान मेजर जनरल खट्टक ने दावा किया था कि बलूच नागरिक प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं और राज्य संस्थाओं को बदनाम करने के अभियान को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने बलूचिस्तान में अशांति के लिए विदेशी एजेंसियों को दोषी ठहराया था। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में तीन जजों की पीठ बलूचिस्तान से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
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मुख्य न्यायाधीश ने माना कि बलूचिस्तान में स्थिति खतरनाक और अस्थिर है। उन्होंने कहा कि फ्रंटियर कोर के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और उन लोगों के शव पाए गए, जिन्होंने अर्द्ध सैनिक बल के खिलाफ सबूत मुहैया कराए। पीठ ने कहा कि बलूचिस्तान में पिछले दो से तीन दिनों के दौरान करीब 20 लोगों की हत्या कर दी गई। पीठ के सदस्य जस्टिस जव्वाद ख्वाजा ने यह भी कहा, ‘हम सुरक्षा एजेंसियों के दुश्मन नहीं हैं और ना ही एजेंसियां हमारी दुश्मन हैं। हम उन्हें क्रेडिट देने को तैयार हैं पर उन्हें वैसा काम करना चाहिए।’