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रिजल्ट रद्द कराने को याचिका दायर करेंगे सबाही
काहिरा/एजेंसी
Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
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मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में तीसरे स्थान पर आने वाले वामपंथी उम्मीदवार हामदीन सबाही ने चुनाव में हुई कथित धांधलियों की वजह से इसे रद्द कराने के लिए याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। सबाही के वकील एसाम अल इसलामबोली ने बताया कि चुनाव में हुई गड़बड़ियों को रेखांकित करते हुए हम राष्ट्रपति निर्वाचन समिति के समक्ष याचिका दायर करेंगे।
इसलामबोली ने बताया कि समिति से एक पुलिस अधिकारी के उन आरोपों की जांच करने का भी आग्रह किया जाएगा जिसमें उसने देश के गृहमंत्रालय द्वारा पूर्व तानाशाह हुस्नी मुबारक के विश्वसनीय माने जाने वाले उम्मीदवार अहमद शफीक के पक्ष में नौ लाख वोटों की हेराफेरी करने की बात कही थी। शफीक चुनाव के पहले चरण में 24 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर आए थे जबकि मुसलिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद मोर्सी 25 फीसदी मतों के साथ पहले स्थान पर रहे थे। हामदीन को 22 फीसदी मत मिले थे।
उन्होंने बताया कि इस जांच के नतीजे सामने आने तक चुनाव परिणामों को रद्द किए जाने की मांग की जाएगी। निर्वाचन समिति द्वारा शफीक समेत मुबारक के करीबी समझे जाने वाले व्यक्तियों की उम्मीदवारी खारिज करने के फैसले पर संवैधानिक अदालत का निर्णय आने तक चुनावी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने की मांग भी की जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि निर्वाचन समिति ने मुबारक सरकार के दूसरे सभी मंत्रियों को तो चुनाव में उतरने नहीं दिया था लेकिन शफीक पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था। मिस्र में 16 एवं 17 जून को होने वाले चुनाव के दूसरे चरण में अंतिम मुकाबला कट्टरपंथी समझे जाने वाले मोर्सी और सेना समर्थक समझे जाने वाले शफीक के बीच होना है जिसे लेकर देश के क्रांतिकारी तबके में गहरा रोष है।
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इसलामबोली ने बताया कि समिति से एक पुलिस अधिकारी के उन आरोपों की जांच करने का भी आग्रह किया जाएगा जिसमें उसने देश के गृहमंत्रालय द्वारा पूर्व तानाशाह हुस्नी मुबारक के विश्वसनीय माने जाने वाले उम्मीदवार अहमद शफीक के पक्ष में नौ लाख वोटों की हेराफेरी करने की बात कही थी। शफीक चुनाव के पहले चरण में 24 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर आए थे जबकि मुसलिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद मोर्सी 25 फीसदी मतों के साथ पहले स्थान पर रहे थे। हामदीन को 22 फीसदी मत मिले थे।
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उन्होंने बताया कि इस जांच के नतीजे सामने आने तक चुनाव परिणामों को रद्द किए जाने की मांग की जाएगी। निर्वाचन समिति द्वारा शफीक समेत मुबारक के करीबी समझे जाने वाले व्यक्तियों की उम्मीदवारी खारिज करने के फैसले पर संवैधानिक अदालत का निर्णय आने तक चुनावी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने की मांग भी की जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि निर्वाचन समिति ने मुबारक सरकार के दूसरे सभी मंत्रियों को तो चुनाव में उतरने नहीं दिया था लेकिन शफीक पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था। मिस्र में 16 एवं 17 जून को होने वाले चुनाव के दूसरे चरण में अंतिम मुकाबला कट्टरपंथी समझे जाने वाले मोर्सी और सेना समर्थक समझे जाने वाले शफीक के बीच होना है जिसे लेकर देश के क्रांतिकारी तबके में गहरा रोष है।