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भारतीय 'जीनियस' ने सुलझाई न्यूटन की पहेलियां
लंदन/एजेंसी
Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
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एक बार फिर भारतीय मेधा ने दुनिया को चौंकाया है। भारतीय मूल के एक जर्मन किशोर ने 350 साल पुरानी उन गणितीय पहेलियों को सुलझाया है, जिन्हें गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी बेहद दुरूह मानते थे। वे सर आइजक न्यूटन द्वारा तैयार की गई इन पहेलियों को सुलझाने के लिए शक्तिशाली कंप्यूटरों की मदद लेते थे।
16 साल की उम्र में कर दिखाया कारनामा
डेली मेल के अनुसार, जर्मनी के द्रेसदेन में रहने वाले शौर्य रे ने दो ‘फंडामेंटल पार्टिकल डायनिमिक्स थ्योरीज’ को हल करने में कामयाबी पाई है। मात्र 16 साल के शौर्य को मिली इस सफलता से पहले गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी इन ‘थ्योरीज’ के आगे खुद को बेबस पाते थे। ये सभी एक स्वर में शौर्य को जीनियस बता रहे हैं। शौर्य की इस सफलता से वैज्ञानिकों को भौतिकी के कुछ अहम सवालों को हल करने में मदद मिलेगी।
6 साल की उम्र से गणित में रूचि
शौर्य की छह वर्ष की उम्र से ही गणित में दिलचस्पी रही है। अपनी स्कूल ट्रिप पर द्रेसदेन यूनिवर्सिटी जाने पर उन्हें न्यूटन की अनसुलझी पहेलियों का पता चला था। उन्होंने कहा कि इन्हें देखकर मुझे लगा कि क्यों नहीं इन्हें हम सुलझा सकते? मुझे यह विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई भी इनसान इन्हें नहीं सुलझा सकता। हालांकि वह पूरी विनम्रता से कहते हैं कि मैं जीनियस नहीं हूं।
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स्कूल ने दो कक्षा आगे बढ़ाया
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्कूल की कुछ और बातों में भी मैं बेहतर होता, जैसे फुटबॉल खेलने में। शौय के पिता इंजीनियर हैं। चार साल पहले शौर्य जब कोलकाता से जर्मनी पहुंचे थे, तो उनके लिए स्थानीय भाषा अनजान थी। लेकिन अब वह फर्राटे से जर्मन बोलते हैं। वैसे, शौर्य की बुद्धिमत्ता को स्कूल ने बहुत जल्दी पहचान लिया था और उन्हें दो कक्षा आगे बढ़ाया दिया गया।
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16 साल की उम्र में कर दिखाया कारनामा
डेली मेल के अनुसार, जर्मनी के द्रेसदेन में रहने वाले शौर्य रे ने दो ‘फंडामेंटल पार्टिकल डायनिमिक्स थ्योरीज’ को हल करने में कामयाबी पाई है। मात्र 16 साल के शौर्य को मिली इस सफलता से पहले गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी इन ‘थ्योरीज’ के आगे खुद को बेबस पाते थे। ये सभी एक स्वर में शौर्य को जीनियस बता रहे हैं। शौर्य की इस सफलता से वैज्ञानिकों को भौतिकी के कुछ अहम सवालों को हल करने में मदद मिलेगी।
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6 साल की उम्र से गणित में रूचि
शौर्य की छह वर्ष की उम्र से ही गणित में दिलचस्पी रही है। अपनी स्कूल ट्रिप पर द्रेसदेन यूनिवर्सिटी जाने पर उन्हें न्यूटन की अनसुलझी पहेलियों का पता चला था। उन्होंने कहा कि इन्हें देखकर मुझे लगा कि क्यों नहीं इन्हें हम सुलझा सकते? मुझे यह विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई भी इनसान इन्हें नहीं सुलझा सकता। हालांकि वह पूरी विनम्रता से कहते हैं कि मैं जीनियस नहीं हूं।
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स्कूल ने दो कक्षा आगे बढ़ाया
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्कूल की कुछ और बातों में भी मैं बेहतर होता, जैसे फुटबॉल खेलने में। शौय के पिता इंजीनियर हैं। चार साल पहले शौर्य जब कोलकाता से जर्मनी पहुंचे थे, तो उनके लिए स्थानीय भाषा अनजान थी। लेकिन अब वह फर्राटे से जर्मन बोलते हैं। वैसे, शौर्य की बुद्धिमत्ता को स्कूल ने बहुत जल्दी पहचान लिया था और उन्हें दो कक्षा आगे बढ़ाया दिया गया।