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भारत का अभिन्न अंग

Thu, 04 Jun 2015 07:56 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 04 Jun 2015 07:56 PM IST
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Integral part of India

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल राहील शरीफ का कश्मीर पर दिया गया ताजा बयान आपत्तिजनक और भड़काने वाला तो है ही, इससे यह भी पता चलता है कि पड़ोसी देश की भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने में दिलचस्पी नहीं है।

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राहील कहते हैं कि कश्मीर 1947 के बाद से पाकिस्तान का अपूर्ण एजेंडा है, जिससे यही पता चलता है कि साढ़े छह दशक बाद भी पाकिस्तान की न तो नीयत बदली है और न नीति। जबकि भारत की स्थिति स्पष्ट है कि गिलगित और बालटिस्तान सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए, पर पाकिस्तान लगातार अपनी गतिविधियों के जरिये इसे विवाद के रूप में स्थापित करना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान इस ओर खींचना चाहता है। गिलगित और बालटिस्तान में चुनाव कराने की योजना उसकी एक और नई साजिश का हिस्सा लगती है, जिसके जरिये वह इस क्षेत्र पर वैधानिकता की मुहर लगाना चाहता है।
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हकीकत यह है कि गिलगित और बालटिस्तान पर उसने जबरन कब्जा कर रखा है और 20 लाख की आबादी वाला यह क्षेत्र मानवाधिकार हनन और उत्पीड़न से जूझ रहा है। यहां तक कि पाकिस्तान के ही मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष इसे 21वीं सदी का उपनिवेश बता चुके हैं! भारत ने यदि वहां चुनाव कराए जाने पर ऐतराज कर पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठाया है, तो यह गलत नहीं है। गिलगित और बालटिस्तान की स्वायत्तता और स्वशासन की यह योजना सैन्य कब्जे वाले इस क्षेत्र को पाकिस्तान का एक नया प्रांत बनाने की साजिश ही लगती है।
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पाक अधिकृत कश्मीर का यह वही क्षेत्र है, जहां से चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक पहुंच बनाने के लिए आर्थिक गलियारा बना रहा है। ऐसे में बीजिंग की यह मंशा होगी कि इसे लेकर कोई विवाद न उठे और यदि इस क्षेत्र को पाकिस्तान का वैधानिक हिस्सा बताने की कोशिश के पीछे यह दबाव भी हो, तो हैरत नहीं होनी चाहिए। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने आर्थिक गलियारे को लेकर भारत की आशंकाओं को खारिज किया है, लेकिन जब तक कथनी और करनी में फर्क खत्म नहीं होगा, इस पर कैसे भरोसा किया जा सकता है; आखिर इसी क्षेत्र में अतीत में पाकिस्तान ने कब्जे वाला करीब पांच हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंप ही दिया था।

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