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किसानों के हित में

Sun, 28 Dec 2014 07:57 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 28 Dec 2014 07:57 PM IST
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In the interest of farmers

यह ज्ञात तथ्य है कि किसानों की कर्ज माफी योजना अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होती है, पर रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की ताजा टिप्पणी पर राजनीतिक वर्ग को भी खास ध्यान देना चाहिए कि कर्ज माफी का किसानों को भी ज्यादा लाभ नहीं होता। अर्थव्यवस्था का सिद्धांत है कि कोई चीज, समाज के किसी वर्ग को, मुफ्त में नहीं मिलनी चाहिए। एक उदाहरण काफी होगा। जहां-जहां किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा दी गई, वहां-वहां बिजली कंपनियों के कर्ज का बोझ तो बढ़ा ही, भू-जल के अंधाधुंध दोहन से भी बड़ा नुकसान हुआ।

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बेशक किसान देश और अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। लिहाजा सूखा, बाढ़, तूफान में, फसल खराब या नष्ट हो जाने पर किसानों द्वारा बैंक से लिए गए कर्ज की वसूली में संवेदना और मानवीयता की अपेक्षा स्वाभाविक है। पर कर्ज माफी इसका समाधान नहीं है। यह एक तो राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर उठाया जानेवाला कदम है, दूसरे, यह किसानों को भी परावलंबी या बेपरवाह बना देता है। सिर्फ यही नहीं कि ऐसी योजना का लाभ अपात्र भी उठाते हैं, बल्कि उन किसानों को इसका फायदा भी नहीं होता, जिन्हें बाद में कर्ज की जरूरत पड़ती है।
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अगर कर्ज माफी सचमुच समस्या का हल होती, तो यूपीए सरकार के समय इसका लाभ मिलने के बाद विदर्भ की तस्वीर आज बदल चुकी होती। जिस समय अर्थव्यवस्था में खेती-किसानी का महत्व लगातार कम हुआ है और किसानों की आत्महत्याओं के ब्योरे भी नजरंदाज कर दिए जा रहे हैं, तब रघुराम राजन की टिप्पणी का गलत अर्थ लगाया जा सकता है। पर उनके कहने का आशय यह कतई नहीं है कि किसानों को सरकारों से मदद नहीं मिलनी चाहिए। किसानों को मदद मिलनी चाहिए, बल्कि जब कृषि क्षेत्र का महत्व अर्थव्यवस्था में निरंतर सिकुड़ता जा रहा हो, तब वे ज्यादा मदद के हकदार हैं, लेकिन ऐसी कोई भी सहायता राजनीतिक हितों से प्रेरित क्यों हो?
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सामूहिक कर्ज माफी के बजाय ऐसी दीर्घगामी परियोजनाओं पर काम करना ज्यादा व्यावहारिक है, जिसका स्थायी लाभ किसानों को भी मिले और अर्थव्यवस्था को भी। मसलन, बुंदेलखंड के किसानों को साहूकारों के जाल से मुक्त किया जाए, सिंचाई की समुचित व्यवस्था बने और कृषि उत्पादों की खरीद का एक मजबूत नेटवर्क हो, तो वह किसानों की कर्ज माफी योजना से कहीं ज्यादा ठोस कदम होगा।

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