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संकट के समय राग कश्मीर

Wed, 20 Aug 2014 08:30 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Aug 2014 08:30 PM IST
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In problem time Raga kashmir

यह भारत जैसे लोकतंत्र में ही संभव है कि सरकार की आपत्ति के बावजूद एक पड़ोसी देश का उच्चायुक्त राजधानी में बैठकर अलगाववादियों के साथ बातचीत करे, फिर उसे जायज ठहराने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित करे! अब्दुल बासित बेशक यह गलत नहीं कह रहे थे कि पिछले करीब बीस वर्षों से भारत-पाक के बीच आधिकारिक वार्ता से पहले पाकिस्तानी उच्चायोग हुर्रियत कॉन्फ्रेंस समेत घाटी के दूसरे अलगाववादी संगठनों के साथ गोपनीय बातचीत का मंच बनता है। पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने इस पर चुप्पी साध ली कि इस बार भारत सरकार द्वारा पहले से चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने अलगाववादियों से मुलाकात का जोखिम क्यों उठाया।

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संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने इस पर भी जान-बूझकर कुछ नहीं बोला कि नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आए नवाज शरीफ को अलगाववादियों के साथ बातचीत के लिए मना किया गया था, जिसे उन्होंने माना था, और उसी आधार पर भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की जमीन तैयार हुई थी। इन सबकी अनदेखी कर अब्दुल बासित यह तक कहने से नहीं चूके कि कश्मीरी अलगाववादी शांति प्रक्रिया के वैधानिक हिस्सेदार हैं! ऐसे में, भारत सरकार को शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र का हवाला देते हुए इस्लामाबाद को ठीक ही याद दिलाना पड़ा है कि बातचीत के दो ही पक्षकार हैं-भारत और पाकिस्तान। इसके बावजूद भारत अगर अपनी जमीन पर पाकिस्तान को अलगाववादियों से मिलने देता रहा है, तो उसके पीछे कोई बाध्यता नहीं है, बल्कि यह एक लोकतांत्रिक देश के उदारवादी नजरिये का उदाहरण है।
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पर पाकिस्तान ने न सिर्फ भारत में हुए आतंकी हमलों में अपने यहां के आतंकी संगठनों को दंडित करने का कदम नहीं उठाया, बल्कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले उन अलगाववादियों से, जिन्हें घाटी के नागरिकों ने खारिज कर दिया है, उसकी मुलाकात भी बहुत कुछ कह जाती है। क्यों न मानें कि पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति से ध्यान बंटाने के लिए ही वह युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने से लेकर कश्मीर का मुद्दा उठाना चाहता है। पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार के साथ संवाद का रास्ता बंद करने का नुकसान भारत को भी है, पर सवाल यह है कि पड़ोस से संबंध सुधारने की सदिच्छा का वह कब तक नुकसान उठाता रहेगा।

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