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अगर महिलाओं को सुरक्षा नहीं दे सकते तो...
Jind
Updated Tue, 03 Jun 2014 01:09 AM IST
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रत्ता खेड़ा गांव की गायब हुई दो नवविवाहिताओं के मामले में महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। इसको लेकर महिलाओं ने पंचायत कर साफ शब्दों में कहा कि जब सरकार और पुलिस प्रशासन मिलकर भी लड़कियों को सुरक्षा नहीं दे सकता तो महिलाओं को कन्या भ्रूण हत्या करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
रत्ताखेड़ा गांव में सोमवार को गांव की दादा खेड़ा चौपाल में महिलाओं ने पंचायत की। पंचायत में महिलाओं का कहना है कि लड़कियों पर खतरा बना हुआ है और वह अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें घर से भी अपहरण कर ले जाया जा रहा है। उनके साथ दुष्कर्म कर उनको मौत के घाट उतार दिया जाता है, लेकिन पुलिस और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। इसलिए सरकार को लड़कियों को गर्भ में ही मारने की इजाजत देनी चाहिए।
एक तरफ महिलाओं ने गांव की चौपाल में बैठक कर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कन्या भ्रूण हत्या करने की इजाजत मांग कर दबाव बनाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर गांव के लोगों द्वारा डीएसपी विरेंद्र दलाल की बुलावे पर जींद जा कर मामले से जुड़े सभी पहलुओं के बारे में चर्चा की गई।
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डीएसपी हेडक्वार्टर विरेन्द्र दलाल द्वारा मामले को सीआईए को सुपुर्द करने के बाद मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब जांच करने आई टीम के सामने एक आरोपी ने पूछताछ के दौरान कोई जहरीली चीज खाने का दावा किया। उल्टी करते हुए आरोपी को सामान्य अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने युवक की हालत देखे हुए रोहतक मेडिकल में रेफर कर दिया। बताया जाता है कि युवक की हालत काबू में थी।
यह है मामला
गांव रत्ताखेड़ा की नवविवाहिता एक मई को रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हो गई थी। महीने भर से गायब लड़की का पता लगाने में नाकाम पुलिस के खिलाफ रविवार को ग्रामीणों ने सफीदों-जींद सड़क मार्ग पर रत्ताखेडा मोड़ पर जाम लगा दिया था। ग्रामीणों ने जाम के दौरान भी पुलिस पर अनेक गंभीर आरोप लगाए। मामले को शांत करने के लिए जाम खुलवाने आए जिला मुख्यालय के डीएसपी वीरेंद्र दलाल ने मामले को सीआईए के सुपुर्द करने व महिला पुलिस कर्मचारियों की जांच टीम भी गठित की।
इससे पहले भी हुई है घटना
गांव रत्ताखेड़ा की महिलाएं गीता रानी, सावत्री, रोशनी, कमला, बतेरी, सीला, लक्ष्मी, निर्मला आदि ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी गांव रत्ताखेड़ा गांव की लड़की की 10 जनवरी को उठाकर हत्या कर दी गई थी। जिसका शव दस दिनों बाद गांव कालवा में माइनर नंबर तीन में मिला था। गले में बेल्ट लगाकर उसकी हत्या की गई थी। लेकिन आज साढे़ चार महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस उसके हत्यारों को नहीं ढूंढ पाई है। इसलिए लड़कियों का समाज में आने कोई अधिकार नहीं है।
महिलाओं की मांग गलत
गांव की महिलाओं द्वारा कन्या भ्रूण हत्या करने की बात कहकर समाज में एक बुरा संदेश दिया है। पुलिस दोनों मामलों पर तफ्तीश की रही है। सभी मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवा रहा है। परिजनों द्वारा शक के आधार पर जो भी नाम बताया गए है, उन सभी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सबूत ढूंढने का इंतजार कर रही है।
रमेश चंद, डीएसपी सफीदों
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रत्ताखेड़ा गांव में सोमवार को गांव की दादा खेड़ा चौपाल में महिलाओं ने पंचायत की। पंचायत में महिलाओं का कहना है कि लड़कियों पर खतरा बना हुआ है और वह अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें घर से भी अपहरण कर ले जाया जा रहा है। उनके साथ दुष्कर्म कर उनको मौत के घाट उतार दिया जाता है, लेकिन पुलिस और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। इसलिए सरकार को लड़कियों को गर्भ में ही मारने की इजाजत देनी चाहिए।
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एक तरफ महिलाओं ने गांव की चौपाल में बैठक कर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कन्या भ्रूण हत्या करने की इजाजत मांग कर दबाव बनाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर गांव के लोगों द्वारा डीएसपी विरेंद्र दलाल की बुलावे पर जींद जा कर मामले से जुड़े सभी पहलुओं के बारे में चर्चा की गई।
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डीएसपी हेडक्वार्टर विरेन्द्र दलाल द्वारा मामले को सीआईए को सुपुर्द करने के बाद मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब जांच करने आई टीम के सामने एक आरोपी ने पूछताछ के दौरान कोई जहरीली चीज खाने का दावा किया। उल्टी करते हुए आरोपी को सामान्य अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने युवक की हालत देखे हुए रोहतक मेडिकल में रेफर कर दिया। बताया जाता है कि युवक की हालत काबू में थी।
यह है मामला
गांव रत्ताखेड़ा की नवविवाहिता एक मई को रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हो गई थी। महीने भर से गायब लड़की का पता लगाने में नाकाम पुलिस के खिलाफ रविवार को ग्रामीणों ने सफीदों-जींद सड़क मार्ग पर रत्ताखेडा मोड़ पर जाम लगा दिया था। ग्रामीणों ने जाम के दौरान भी पुलिस पर अनेक गंभीर आरोप लगाए। मामले को शांत करने के लिए जाम खुलवाने आए जिला मुख्यालय के डीएसपी वीरेंद्र दलाल ने मामले को सीआईए के सुपुर्द करने व महिला पुलिस कर्मचारियों की जांच टीम भी गठित की।
इससे पहले भी हुई है घटना
गांव रत्ताखेड़ा की महिलाएं गीता रानी, सावत्री, रोशनी, कमला, बतेरी, सीला, लक्ष्मी, निर्मला आदि ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी गांव रत्ताखेड़ा गांव की लड़की की 10 जनवरी को उठाकर हत्या कर दी गई थी। जिसका शव दस दिनों बाद गांव कालवा में माइनर नंबर तीन में मिला था। गले में बेल्ट लगाकर उसकी हत्या की गई थी। लेकिन आज साढे़ चार महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस उसके हत्यारों को नहीं ढूंढ पाई है। इसलिए लड़कियों का समाज में आने कोई अधिकार नहीं है।
महिलाओं की मांग गलत
गांव की महिलाओं द्वारा कन्या भ्रूण हत्या करने की बात कहकर समाज में एक बुरा संदेश दिया है। पुलिस दोनों मामलों पर तफ्तीश की रही है। सभी मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवा रहा है। परिजनों द्वारा शक के आधार पर जो भी नाम बताया गए है, उन सभी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सबूत ढूंढने का इंतजार कर रही है।
रमेश चंद, डीएसपी सफीदों