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ब्रिक्स से उम्मीदें

Wed, 16 Jul 2014 08:22 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 16 Jul 2014 08:22 PM IST
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hopes from brics

छठा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन विश्व मंच पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति का पहला मौका था, और इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने की बात कर उन्होंने सकारात्मक संदेश दिया।

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हालांकि सबकी उत्सुकता ब्रिक्स बैंक को लेकर थी, जिसे मंजूरी मिल गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि तो है ही, भारत के लिए यह इसलिए भी उल्लेखनीय है कि इसका सुझाव पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया था। ब्रिक्स का उद्देश्य अमेरिका और यूरोप के बरक्स एक समानांतर व्यवस्था स्थापित करना है, जो पक्षपात से रहित हो।
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ब्रिक्स बैंक का जो प्रशासनिक ढांचा तय हुआ है, वह इसी दिशा में उठा कदम हैः इसमें एक देश-एक वोट की व्यवस्था है। यानी इस बैंक से जुड़े फैसले में कोई भी सदस्य वीटो नहीं कर पाएगा। मतलब यह कि ब्रिक्स बैंक को विश्व बैंक, जिसमें अमेरिका का घोषित वर्चस्व है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, जो सिर्फ यूरोप का हित देखता है, की तुलना में अधिक लोकतांत्रिक वित्तीय संस्था बनाने का लक्ष्य है। वैसे भी ब्रिक्स सिर्फ आर्थिक तालमेल तक सीमित नहीं रहने वाला। भविष्य में एक ब्रिक्स फ्यूल बैंक स्थापित करने की योजना है, तो इसके सदस्य देश आगे विश्व कूटनीति को अमेरिकी वर्चस्ववाद से मुक्त करने की रूपरेखा भी तय करने वाले हैं।
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ब्रिक्स का लक्ष्य बेशक स्वागतयोग्य है, पर उन पर खरा उतरना क्या आसान है! अव्वल तो इनकी महत्वाकांक्षा और आपसी प्रतिद्वंद्विता छिपाए नहीं छिपती। बैंक के मुख्यालय और इसके अध्यक्ष के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच जो रस्साकशी चली, और जिस तरह कहा जा रहा है कि बैंक का सर्वाधिक लाभ रूस उठाएगा, और चीन इस पर अपना वर्चस्व स्थापित करेगा, उनसे आगे आशंकाएं ही पैदा होंगी। फिर विश्व बैंक का विकल्प बन पाना उतना सहज भी नहीं है; वह दुनिया भर के अनेक देशों में विकासपरक योजनाओं की फंडिंग करता है।


इसी तरह विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी से निकालने में ब्रिक्स देशों का योगदान बेशक बड़ा है, पर अब भी तमाम निवेशकों की मंजिल तो अमेरिका ही है। ऐसे में, ब्रिक्स देशों से शुरुआती अपेक्षा यही है कि वे अपने आपसी विवादों को खत्म करें। मसलन, ब्राजील में उठे ठोस कदम के बाद हम यह उम्मीद क्यों न करें कि चीन और भारत सीमा विवाद समेत तमाम मुद्दों को हल करने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे!

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