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तस्वीर बदलने की उम्मीद

Sun, 12 Oct 2014 08:00 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Oct 2014 08:00 PM IST
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Hope of change the picture

आईएसएल यानी इंडियन सुपर लीग की शुरुआत देर से होने के बावजूद इस अर्थ में स्वागतयोग्य है कि इससे देश में फुटबॉल की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। सिर्फ यही नहीं कि देश में फुटबॉल का ऐसा आयोजन इससे पहले नहीं हुआ, देश ने चर्चित विदेशी फुटबॉलरों का ऐसा जमावड़ा भी इससे पहले नहीं देखा।

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डेल पिएरो, लुइस गार्सिया और रॉबर्ट पाइरेस जैसे फुटबॉलर भले ही अब अपनी प्रतिभा के शिखर पर नहीं हैं, लेकिन इनका फुटबॉल कौशल अब भी आकर्षित करता है। एफसी गोवा टीम के कोच की भूमिका में ब्राजील के वह जिको हैं, जिन्हें फुटबॉल विश्व ह्वाइट पेले के नाम से जानता है और हाल के वर्षों में जापान को फुटबॉल में एक ताकत बनाने में जिनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। लिहाजा उम्मीद करनी चाहिए कि यूरोपीय फुटबॉल के साथ-साथ लैटिन अमेरिका के कलात्मक फुटबॉल का नजारा देखने को मिलेगा।
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भारत जैसे देश में ऐसे एक आयोजन का सचमुच बहुत महत्व है, जहां दशकों से न सिर्फ फुटबॉल के प्रति एक किस्म की उदासीनता है, बल्कि फीफा रैंकिंग में देश का गिरता स्तर भी अब किसी को चिंतित नहीं करता। पर मुश्किल यह है कि विदेशी सितारों की चकाचौंध के बीच आईएसएल में देसी प्रतिनिधित्व फिलहाल सुब्रत पाल और गौरमांगी सिंह जैसे नामचीनों तक ही सीमित है। राष्ट्रीय टीम के कप्तान सुनील छेत्री और रोबिन सिंह जैसों का इसमें न होना चौंकाता है। आईएसएल का फैसला कोई एक दिन में नहीं लिया गया, फिर सभी चर्चित राष्ट्रीय खिलाड़ी इसमें क्यों नहीं हैं? चूंकि फुटबॉल में भारत की कोई पहचान नहीं है, ऐसे में आईएसएल जैसा आयोजन बेशक विदेशी खिलाड़ियों के आकर्षण के बगैर संभव नहीं है। पर इसका लक्ष्य व्यावसायिकता और चकाचौंध के बजाय देसी प्रतिभाओं को आकर्षित करने का होना चाहिए। यह बहुत मुश्किल भी नहीं है। हाल के वर्षों में मिजोरम जैसे फुटबॉल के कई नए केंद्र बने हैं, जो उम्मीद जगाते हैं।
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पर क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और कबड्डी के विपरीत, जिनके लीग हाल के वर्षों में हमारे यहां शुरू हुए, फुटबॉल में भारत बहुत पीछे है, इसलिए आईएसएल को बिल्कुल शुरू से अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहना होगा। भारत में फुटबॉल के प्रति बाजार का यह उत्साह स्वागतयोग्य तो है, पर आईपीएल के हश्र के बाद चौकन्ना रहने की भी जरूरत है।

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